
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार ने शुक्रवार को अपने दो वर्ष पूरे कर लिए। इस दौरान प्रदेश के कृषि क्षेत्र में उत्पादन, उत्पादकता और फसल विविधीकरण के क्षेत्र में कई नए कीर्तिमान स्थापित हुए हैं। वर्ष 2023-24 से 2024-25 के बीच खाद्यान्न उत्पादन में 55 लाख टन से अधिक की रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो सरकार की किसान हितैषी नीतियों, सिंचाई विस्तार और आधुनिक कृषि योजनाओं की सफलता को दर्शाती है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023-24 में प्रदेश का कुल खाद्यान्न उत्पादन 5.34 करोड़ मीट्रिक टन था, जो 2024-25 में बढ़कर 6.13 करोड़ मीट्रिक टन हो गया। इसी अवधि में कुल कृषि उत्पादन 7.24 करोड़ टन से बढ़कर 7.79 करोड़ मीट्रिक टन पहुंच गया। यह उल्लेखनीय वृद्धि उन्नत बीजों के वितरण, फसल बीमा योजनाओं, सिंचाई परियोजनाओं के विस्तार और कृषि यंत्रीकरण का परिणाम मानी जा रही है।
उत्पादन और उत्पादकता में सुधार
सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक कुल खाद्यान्न उत्पादकता 2023-24 में 3322 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी, जो 2024-25 में बढ़कर 3650 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो गई। वहीं कुल कृषि उत्पादकता 2379 से बढ़कर 2627 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई।
गेहूं, मक्का और धान का योगदान
फसलवार आंकड़ों पर नजर डालें तो गेहूं उत्पादन 2023-24 में 3.28 करोड़ टन से बढ़कर 2024-25 में 3.82 करोड़ टन हो गया। मक्का उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई और यह 48.68 लाख टन से बढ़कर 69.37 लाख टन पहुंच गया। धान का कुल उत्पादन हालांकि 1.40 करोड़ टन से थोड़ा घटकर 1.36 करोड़ टन रहा, लेकिन प्रति हेक्टेयर उत्पादकता 3415 किलोग्राम से बढ़कर 3551 किलोग्राम हो गई।
दलहन-तिलहन की स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार सोयाबीन उत्पादन 66.24 लाख टन, मूंगफली 15.47 लाख टन और तिल 1.69 लाख टन रहा। कुल तिलहन उत्पादन मामूली कमी के साथ 94.95 लाख टन पर स्थिर रहा। दलहन वर्ग में चना उत्पादन 35.83 लाख टन से घटकर 22.04 लाख टन रहा, जबकि मूंग बढ़कर 21.28 लाख टन और उड़द 1.51 लाख टन तक पहुंच गई।
किसानों की आय बढ़ाने पर फोकस
पिछले दो वर्षों में राज्य सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए एमएसपी पर खरीदी का दायरा बढ़ाया, ड्रिप व स्प्रिंकलर सिंचाई को प्रोत्साहन दिया, फसल विविधीकरण नीति लागू की और ई-उपार्जन व डिजिटल भुगतान व्यवस्था को सशक्त किया।
विशेषज्ञों की राय
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह बढ़त केवल अनुकूल मौसम का परिणाम नहीं है, बल्कि समय पर खाद-बीज की उपलब्धता, त्वरित भुगतान और प्रभावी नीतिगत फैसलों का नतीजा है। जबलपुर कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पी.के. मिश्रा के अनुसार भावांतर योजना, सौर ऊर्जा संयंत्र और दुग्ध प्रोत्साहन जैसी योजनाओं ने खेती की लागत घटाई है और किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद की है। उन्होंने कहा कि भविष्य में इन उपलब्धियों को टिकाऊ बनाए रखने के लिए मंडी व्यवस्था, सिंचाई ढांचे और तकनीकी संसाधनों को और मजबूत करने के साथ किसानों की भागीदारी बढ़ाना जरूरी होगा।















