
JNU Slogan Controversy : ‘नरेंद्र मोदी और अमित शाह… तेरी कब्र खुदेगी…’ ये नारे, JNU के कैंपस में गूंज रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत नहीं दी, तो जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय यानी जेएनयू परिसर में एक बार फिर सियासी बहस गरम हो गई है। छात्र शरजील उमर के समर्थन में प्रदर्शन शुरू कर दिया है।
दरअसल, सोमवार रात, जब अदालत ने इन दोनों छात्र नेताओं को जमानत नहीं दी, उसके तुरंत बाद छात्रों के एक समूह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ नारेबाजी की। ये वाकया उस समय सुर्खियों में आ गया, जब एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें देखा जा सकता है कि छात्रों ने इन दोनों नेताओं के खिलाफ नारे लगाए।
इस विरोध प्रदर्शन को लेकर कई तरह की प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष का कहना है कि यह 5 जनवरी 2020 को हुई हिंसा की बरसी पर किया गया एक वैचारिक विरोध था। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये नारे किसी व्यक्ति पर व्यक्तिगत आक्रमण नहीं थे। उन्होंने PTI से बात करते हुए कहा, “हर साल, छात्र 5 जनवरी को, जब उस दिन हुई हिंसा की याद में विरोध प्रदर्शन करते हैं, तो इसमें लगाए गए नारे वैचारिक थे। इनका किसी के खिलाफ व्यक्तिगत रूप से कोई अर्थ नहीं है।”
वहीं, पुलिस का कहना है कि इस मामले में अभी तक कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि कानून-व्यवस्था की स्थिति सामान्य है और पूरे मामले पर नजर रखी जा रही है।
बहरहाल, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने इस नारेबाजी को लेकर तीखे भाष्य किए हैं। उन्होंने कहा, “कुछ लोगों ने JNU को ‘टुकड़े-टुकड़े’ गैंग का अड्डा बना दिया है। राहुल गांधी, TMC, कम्युनिस्ट जैसे लोग इस गैंग का हिस्सा हैं। ये लोग सुप्रीम कोर्ट का भी सम्मान नहीं करते। खालिद अंसारी और शरजील इमाम के समर्थन में और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ नारे लगाए गए हैं। ऐसे लोगों पर देशद्रोह का मुकदमा चलना चाहिए। जिनके पास पाकिस्तान की मानसिकता है, वे भारत के लोगों को कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे।”
यह घटना 5 जनवरी 2020 को जेएनयू में हुई भारी हिंसा की याद दिलाती है, जब नकाबपोश भीड़ ने हॉस्टलों में घुसकर छात्रों पर लाठी, पत्थर और लोहे की रॉड से हमला किया था। उस समय, छात्रसंघ अध्यक्ष आइशी घोष समेत कम से कम 28 छात्र घायल हुए थे। दिल्ली पुलिस की भूमिका भी उस समय विवाद में रही थी, जब छात्र नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।
यह भी पढ़े : फतेहपुर : अवैध शराब की फैक्ट्री पकड़ी, 12 भट्ठियां की ध्वस्त, 150 लीटर कच्ची शराब बरामद














