आज SCO समिट में एक मंच पर दिखेंगे मोदी, पुतिन और जिनपिंग; टेंशन में डोनाल्ड ट्रंप

PM Modi China Visit : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को चीन के तियानजिन पहुंचे हैं। यहां वह आज से शुरू हो रहे दो दिवसीय SCO समिट में भाग लेंगे, जिस पर दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।

बता दें कि इससे पहले पीएम मोदी ने 7 साल पहले, यानी 2018 में चीन का दौरा किया था। जून 2020 में लद्दाख की गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद भारत और चीन के संबंधों में गहरी खटास आ गई थी।

SCO समिट में 20 से अधिक देश भाग लेंगे

चीन के इतिहास में आयोजित सबसे बड़ी SCO समिट में 20 से अधिक देश शामिल हो रहे हैं। इनमें भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, साथ ही मध्य पूर्व, सेंट्रल एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और दक्षिण एशिया के नेता भी भाग लेंगे।

जिनपिंग और पुतिन से मुलाकात करेंगे पीएम मोदी

तियानजिन शहर में होने वाले इस समिट के बाद, पीएम मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात हो सकती है। इसके अलावा, सोमवार, 1 सितंबर को, पीएम मोदी की रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से पहले ही मुलाकात तय है।

SCO समिट में भारत की मौजूदगी क्यों खास है?

यह समिट 31 अगस्त से शुरू होकर 1 सितंबर तक चलेगा। इसमें 20 देशों के प्रमुख शामिल होंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कई देशों पर ‘टैरिफ बम’ गिराए जाने के बाद, यह SCO समिट भारत के लिए विशेष महत्व रखता है। ट्रंप ने भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाया, जिससे कुल शुल्क 50 प्रतिशत हो गया है। वहीं, चीन पर 200 प्रतिशत टैरिफ लगाने की बात कही गई है। ऐसे में, उम्मीद है कि भारत चीन से टैरिफ का करारा जवाब देगा।

ट्रंप की नींद उड़ी हुई है

जब पीएम मोदी, पुतिन और शी जिनपिंग जैसे दिग्गज एक मंच पर जुटेंगे, तो अमेरिका के लिए तनाव बढ़ सकता है। इस दौरान, वैश्विक संकटों जैसे रूस-यूक्रेन युद्ध, इजरायल-हमास संघर्ष और अमेरिका-व्यापार युद्ध पर चर्चा होने की संभावना है। 2018 के बाद पहली बार चीन की यात्रा पर पहुंचे पीएम मोदी का यह कदम भारत-चीन संबंधों को फिर से मजबूत करने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। वहीं, चीन इस समिट का उपयोग अमेरिका को अपनी शक्ति का प्रदर्शन करने के लिए कर रहा है। चीन में 20 देशों के नेताओं का यह ‘महाजुटाव’ ट्रंप को चिंतित कर सकता है।

यह समय जब दुनिया कई संकटों से जूझ रही है, तब SCO समिट महत्वपूर्ण हो जाता है। पीएम मोदी की शी जिनपिंग के साथ वन-टू-वन बैठक और पुतिन के साथ द्विपक्षीय वार्ता विश्व की कूटनीति का नया अध्याय लिख सकती हैं। इस मुलाकात में वैश्विक राजनीति की दिशा तय हो सकती है। फिलहाल, अमेरिका और यूरोप इस समिट को लेकर अपनी निगाहें टिकाए हुए हैं।

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