माघ मेला 2026 का सबसे बड़ा स्नान पर्व मौनी अमावस्या सकुशल संपन्न, 4.52 करोड़ श्रद्धालुओं ने पावन त्रिवेणी के जल में लगाई पुण्य की डुबकी

  • शंकराचार्य, दंडी स्वामी और कल्पवासियों ने मौन होकर लगाई अक्षय पुण्य की डुबकी, मेले की व्यवस्था को बताया उत्तम
  • खाक चौक व्यवस्था समिति के धर्म गुरुओं ने पैदल त्रिवेणी आकर किया सामूहिक स्नान, निर्मल जल में स्नान कर हुए अभिभूत
  • योगी सरकार ने श्रद्धालुओं और संतों की आस्था को किया नमन, हेलिकॉप्टर से श्रद्धालुओं पर की गई पुष्प वर्षा

Prayagraj : संगम तट पर लगे आस्था के जनसमागम माघ मेले का सबसे बड़ा और तीसरा स्नान पर्व मौनी अमावस्या सकुशल संपन्न हो गया। त्रिवेणी के तट पर भोर से छाए घने कोहरे और ठंड पर श्रद्धालुओं की आस्था भारी पड़ी। देर शाम तक संगम के विभिन्न घाटों में स्नान करने वालों की संख्या 4 करोड़ के पार पहुंच गई। मेला प्रशासन की भीड़ प्रबंधन की नई रणनीति और सतर्कता से स्नान सुगमता से संपन्न होने के बाद अधिकारियों ने राहत की सांस ली।

मौनी अमावस्या पर संगम में आस्था का सैलाब, 4.52 करोड़ श्रद्धालुओं ने किया पुण्य स्नान

प्रयागराज में त्रिवेणी के तट पर चल रहे माघ मेले के सबसे बड़े स्नान पर्व पर विपरीत मौसम और कड़ाके की ठंड भी श्रद्धालुओं की आस्था को रोक नहीं सकी। भोर में गहरी धुंध की चादर ने पूरे माघ मेला क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया। दृश्यता दो मीटर से भी कम हो गई, जिससे श्रद्धालुओं को एक-दूसरे का हाथ पकड़कर चलना पड़ा। इसके बावजूद श्रद्धालुओं का सैलाब लगातार उमड़ता रहा।
मेला अधिकारी ऋषिराज ने बताया कि सुबह 8 बजे तक विभिन्न घाटों पर 1.3 करोड़ श्रद्धालु स्नान कर चुके थे, जबकि दोपहर 4 बजे तक यह संख्या 3.82 करोड़ हो गई। स्नान पर्व के समापन तक कुल 4.52 करोड़ श्रद्धालुओं ने पुण्य स्नान किया। मेला प्रशासन के अनुसार अब तक माघ मेले में 10 करोड़ से अधिक श्रद्धालु पुण्य की डुबकी लगा चुके हैं।

शंकराचार्य, दंडी स्वामी, संत और कल्पवासियों ने मौन होकर लगाई अक्षय पुण्य की डुबकी

शंकराचार्य, दंडी स्वामी, संतों और कल्पवासियों की उपस्थिति माघ मेले को दिव्य स्वरूप प्रदान करती है। मौनी अमावस्या का स्नान इनके लिए विशेष महत्व रखता है। धार्मिक मान्यता है कि माघ मास में संगम तट पर कल्पवास न कर पाने वाले श्रद्धालु भी यदि मौनी अमावस्या के दिन स्नान कर लें तो उन्हें एक महीने के कल्पवास के समान पुण्य फल प्राप्त होता है।

जगद्गुरु शंकराचार्य गोवर्धन पीठ स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ जी महाराज ने पुण्य काल में पावन जल में स्नान किया। उन्होंने कहा कि माघ मेले की व्यवस्थाएं भव्य और दिव्य हैं। पुलिस प्रशासन से लेकर स्वच्छता तक, उत्तर प्रदेश सरकार की प्राथमिकताएं हर स्तर पर स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं।
दंडी स्वामी संतों ने अपनी परंपरा के अनुसार नजदीकी गंगा घाटों में स्नान किया, वहीं कल्पवासियों ने भी धुंध और कोहरे के बावजूद अपने-अपने शिविरों से निकलकर समीपवर्ती घाटों पर पूजा-अर्चना कर मौन व्रत का पालन किया।

खाक चौक व्यवस्था समिति के धर्म गुरुओं ने पैदल आकर किया सामूहिक स्नान

गंगा के उस पार रामानुजाचारी और रामानंदी संप्रदाय से जुड़े खाक चौक व्यवस्था समिति के धर्म गुरुओं और जगद्गुरुओं ने अपनी परंपरा के अनुसार पैदल अपने शिविरों से संगम पहुंचकर सादगीपूर्ण ढंग से त्रिवेणी में मौनी अमावस्या का सामूहिक स्नान किया।
जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी संतोष दास ने बताया कि मौन धारण कर सादगी के साथ त्रिवेणी स्नान की परंपरा संत समाज में सदियों से चली आ रही है, जिसका पालन करते हुए संतों ने पुण्य स्नान किया। निर्मल और दिव्य जल में स्नान कर संत समाज अभिभूत हो गया। सनातनी किन्नर अखाड़े ने भी मां गंगा में मौनी अमावस्या का पुण्य स्नान किया।

हेलिकॉप्टर से श्रद्धालुओं पर की गई पुष्प वर्षा

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने मौनी अमावस्या के स्नान पर्व पर श्रद्धालुओं और संतों की आस्था को सम्मान देते हुए माघ मेला क्षेत्र के विभिन्न घाटों पर हेलिकॉप्टर से पुष्प वर्षा कराई।
मध्य प्रदेश के सतना से स्नान करने आए आनंद शरण पांडे ने कहा कि त्रिवेणी में स्नान के बाद आसमान से पुष्प वर्षा होना एक अलौकिक और गर्वपूर्ण अनुभव रहा। वहीं इटली से आए पर्यटक एविको ने कहा कि यहां उन्हें जो दिव्यता और शांति की अनुभूति हुई, वह दुनिया में कहीं और संभव नहीं है।

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