Mainpuri : फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र से जमीन हड़पने का आरोप, तहसील और विकास खंड कार्यालय से बड़ा जालसाजी कांड उजागर

Mainpuri : मैनपुरी जनपद के थाना किशनी क्षेत्र से जमीन विवाद से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाकर करोड़ों की संपत्ति हड़पने की साजिश रचने का आरोप लगाया गया है। पीड़ित सुनील किशोर पुत्र गंगाराम, निवासी ग्राम बसैत थाना किशनी, ने आरोप लगाया है कि उनके सगे भाई नवल किशोर की मृत्यु की तारीख को गलत दर्शाकर उनके द्वारा खरीदी गई जमीन को हड़पने का प्रयास किया जा रहा है जिसमें सरकारी तंत्र में तैनात एक कर्मचारी भी शामिल है। शिकायत के बाद तहसील और विकासखंड कार्यालय में हड़कंप मचा हुआ है।

ग्राम पंचायत सचिव से मिलकर फर्जी प्रमाण पत्र कराया जारी

पीड़ित के अनुसार, उन्होंने अपने जीवित भाई नवल किशोर से वर्ष 2004, 2006 और 2009 में भोगांव तहसील में विधिवत जमीन व मकान का बैनामा कराया था। नवल किशोर की वास्तविक मृत्यु 22 नवंबर 2009 को हुई थी, लेकिन आरोप है कि उनके पुत्र नितिन कुमार, शिवम कुमार, पत्नी किरण कुमारी, गांव के ही उपेंद्र जाटव, कुंवरपाल और ग्राम पंचायत सचिव अर्जित यादव ने आपसी साठगांठ कर 22 मार्च 2004 की फर्जी मृत्यु तिथि दर्शाते हुए कूटरचित मृत्यु प्रमाणपत्र बनवा लिया।

पीड़ित अधिकारियों को शिकायत करके लगा रहा चक्कर

पीड़ित का कहना है कि इस फर्जी दस्तावेज के सहारे तहसील किशनी में तहसीलदार न्यायालय में साक्ष्य प्रस्तुत कर उनके वैध बैनामों को फर्जी घोषित कराने और जमीन अपने नाम कराने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने कई ठोस साक्ष्य भी प्रस्तुत किए हैं, जिनसे नवल किशोर के 2009 तक जीवित रहने की पुष्टि होती है। जिसको लेकर पीड़ित ने एसपी सिटी, एसडीएम किशनी, विकासखंड अधिकारी किशनी, तहसीलदार किशनी को साक्ष्य उपलब्ध कराकर कार्रवाई की मांग की है।

पीड़ित ने मृत प्रमाण पत्र के खिलाफ साक्ष्य किए पेश

साक्ष्यों के अनुसार, नवल किशोर ने वर्ष 2006 में उत्तर प्रदेश सरकारी ग्राम्य विकास बैंक किशनी से 20 हजार रुपये का ऋण लिया था, जो आज भी बकाया है और बढ़कर लगभग 1 लाख 59 हजार रुपये हो चुका है। इसके अलावा, साधन सहकारी समिति बसैत से वर्ष 2000 से 2008 तक खाद-बीज का लेन-देन दर्ज है। वर्ष 2009 में उन्होंने टाटा कंपनी का छोटा हाथी वाहन फाइनेंस पर खरीदा था, जिसकी किस्तें मृत्यु के बाद बीमा के अंतर्गत माफ हुईं। साथ ही वर्ष 2006-07 में विद्युत विभाग से नलकूप कनेक्शन भी लिया गया था। इसके बाद पीड़ित ने सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य देते हुए बताया कि उनके भाई ने विद्युत विभाग के कर्मचारियों के साथ वर्ष 2007 में मारपीट की थी विद्युत विभाग के कर्मचारियों ने उनके खिलाफ वर्ष 2007 में मुकदमा दर्ज कराया था जिसमें वह लगभग 15 -20 दिनों के लिए जेल भी गए थे। जिससे साफ जाहिर होता है कि मुर्दा व्यक्ति इतने सारे क्या कार्य कर सकता है।

फर्जीबाड़ा करने वाले आरोपियों पर कार्रवाई की मांग

पीड़ित ने आरोप लगाया है कि ग्राम पंचायत सचिव की मिलीभगत से बना यह फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र न केवल उनके अधिकारों पर हमला है, बल्कि सरकारी तंत्र और न्यायालय को गुमराह करने का गंभीर प्रयास भी है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि सभी आरोपियों के खिलाफ जालसाजी, धोखाधड़ी और षड्यंत्र की गंभीर धाराओं में कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।

मामले ने स्थानीय स्तर पर हलचल मचा दी है और अब निगाहें प्रशासन व पुलिस की कार्रवाई पर टिकी हैं कि फर्जी दस्तावेजों के इस कथित खेल पर कब और कैसे शिकंजा कसा जाता है।

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