
महराजगंज। किसानों के लिए अच्छी खबर है। कभी गोबर की खाद के लिए किसान परेशान थे। एक ट्राली गोबर खाद के लिए किसानों की हिम्मत टूट रही थी। लेकिन अब पराली के बदले गोबर की खाद मिलने की राह आसान हो गई है।
जिलाधिकारी महराजगंज की अनोखी पहल रंग लाई और उनके अपील पर किसानों ने गौशालाओं में 72 टन पराली पहुंचा कर सराहनीय कार्य किया है। इससे न केवल गेहूं, मसूर,मटर, सरसों का उत्पादन बढ़ने के आसार नजर आने लगे हैं, बल्कि रबी की खेती में फास्फेटिक खादों की लागत कम हो गई है। डीएम के इस किसान हितकारी पहल से पूरे जनपद के गंवई चौपालों पर चर्चाएं खूब सुर्खियां बटोर रही है।
कृषि विभाग के आंकड़े तस्दीक करते हैं कि जनपद में अबकी बार खरीफ में 1.80 लाख हेक्टेयर में धान की खेती हुई है। कृषि जानकारों की मानें तो एक अनुमान के तौर पर एक हेक्टेयर खेत में तकरीबन 550 मैट्रिक टन से लेकर 600 टन पराली उत्पादन होता है। लेकिन रिकॉर्ड तोड़ पराली के उत्पादन ने रबी की खेती का राह में रोड़ा बन गया था। गेहूं की खेती पिछड़ते देख किसान पराली को जलाने लगे थे। इससे न केवल प्रदूषण बढ़ने के आसार नजर आए, बल्कि खेतों में शत्रु और मित्र किट मरने लगे थे। ऐसे में जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा ने गांव में पहुंच कर किसानों को समझाया।
डीएम के निर्देश पर इधर कृषि उप निदेशक संजीव कुमार की टीम ने भी किसानों को जागरूक किया। असर यह रहा कि किसानों की सोच बदलनी शुरू हुई। किसानों के पैर गौशालाओं की ओर बढ़ी और उन्होंने ने गौशालाओं में 72 टन पराली पहुंचा कर उल्लेखनीय कार्य किया है। जिलाधिकारी के इस शानदार पहल से किसानों के मुरझाए चेहरे पर एक बार मुस्कान लौट आई। किसानों की पराली लदी ट्राली की लंबी कतारें गौशालाओं की ओर जाती नजर आई है।
मिल का पत्थर साबित हुई डीएम का सराहनीय प्रयास
यहां बता दें कि धान की कटाई अंतिम दौर में पहुंची है। जहां धान की कटाई पूरी हो गई है। वहां किसानों ने गेहूं, दलहन और तिलहन की बुआई तेजी से कर रहे हैं। इसी बीच जिले के मृदभाषी व स्वच्छ छवि के ईमानदार जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा की एक पहल ने किसानों के उस समस्या को निजात दिलाने में मिल का पत्थर साबित हुई है। जिलाधिकारी ने किसानों से अपील किया कि किसान धान के अवशेषों को अपने नजदीकी गौशालाओं में भेजें। जिससे गौमाता को उनके चारे के रूप में उपयोग किया जा सके। इसका असर हुआ कि जिले के किसान धान की कटाई के उपरांत बचे अवशेषो को गौशालाओं में भेजना शुरू कर दिए।
महराजगंज जिले में अबतक 72 टन पराली किसानों द्वारा भेजी जा चुकी है। आम लोगों में चर्चाएं चहुंओर तेज हो गई है। डीएम संतोष कुमार शर्मा ने बहुत अच्छी पहल की है।खेतों में पराली न जलाने को लेकर प्रशासन लगातार किसानों को जागरूक कर रहा है।जनपद के सभी तहसीलों के सभी ग्राम पंचायत में जिलाधिकारी ने ग्राम प्रधानों को जागरूक करने के साथ कृषि विभाग के अधिकारियों को भी दिशा निर्देश दिए हैं। किसानों को पराली के बदले खाद उपलब्ध कराई जाएगी।
गौशाला के जरिए मिलेगी खाद: डीडीएजी
उपकृषि निदेशक संजीव कुमार ने कहा कि जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा के निर्देश पर किसानों को पराली न जलाने के लिए लगातार जागरूक किया जा रहा है। साथ ही उनसे यह भी अपील की जा रही है कि वह पराली के बदले अपने नजदीकी गौशाला में पराली पहुंचाएं। उसके बदले में पशुओं को भी चारा मिल जाएगा।
किसानों के हित में सराहनीय कदम प्रगतिशील किसान तस्लीम ख़ान,सुजीत कुमार, कृष्ण कुमार सिंह और जनार्दन पटेल ने बताया कि इस काम से किसानों को बहुत फायदे होंगे। उन्होंने कहा कि जिस जगह पर किसान पराली जला रहे हैं। वहां पर कैंसर का खतरा प्रदूषण के कारण ज्यादा हो रहा है। कई ऐसे प्रदेश हैं जहां पर इसी पराली के जरिए कई नुकसान किसानों को हो रहा हैं। लोग बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। डीएम की तरफ से की गई यह पहल सराहनीय है।
किसानों ने कहा कि डीएम ने जिस तरीके से किसानों के हित में यह कदम उठाया है। वह किसानों के हित में है।
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