
Lucknow KGMU : लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में धर्मांतरण और यौन शोषण के आरोपित डॉक्टर रमीज मलिक की गिरफ्तारी के बाद लगातार खुलासे हो रहे हैं। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, कई चौकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। पुलिस की पूछताछ में पता चला है कि आरोपी के खिलाफ पहले भी कई शिकायतें दर्ज थीं, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन पर कोई कार्रवाई नहीं की थी।
क्या है मामला?
मामला धर्मांतरण और यौन शोषण का है, जिसमें आरोपी डॉ. रमीज मलिक पर आरोप है कि उसने आगरा की महिला चिकित्सक का धर्म परिवर्तन कर उससे फर्जी निकाह किया। पुलिस जांच में यह भी पता चला है कि निकाह के समय न तो डॉक्टर और न ही महिला चिकित्सक पीलीभीत के निवासी काजी जाहिद हसन राना द्वारा पढ़वाए गए फर्जी निकाहनामे के आधार पर शादी की गई थी। यह निकाह केवल कागजी कार्रवाई थी, इसमें गवाह शारिक था। पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि निकाह के दौरान दोनों पक्ष पीलीभीत में मौजूद नहीं थे।
डॉ. रमीज मलिक करीब दो हफ्ते से फरार चल रहा था, जिसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की पांच अलग-अलग टीमें लगातार प्रयासरत थीं। पुलिस की जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपी ने अपनी फरारी के दौरान कई डॉक्टरों के संपर्क में रहा और लाखों रुपये का फंड इकट्ठा किया, जिसे वह अपने बचाव और फरारी के खर्च के लिए इस्तेमाल कर रहा था। पुलिस उसकी बैंक ट्रांजेक्शनों की भी गहनता से जांच कर रही है।
शिकायतें और लापरवाही
सूत्रों के अनुसार, आरोपी के खिलाफ 17 दिसंबर को ही एक पीड़िता ने शिकायत दर्ज कराई थी। लेकिन, उस शिकायत को पांच दिनों तक HoD ने दबाए रखा। इसके अलावा, इससे पहले भी कई शिकायतें आई थीं, लेकिन KGMU प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। आरोप है कि विश्वविद्यालय के जिम्मेदार अधिकारी आरोपी को संरक्षण देते रहे, जो कि अब जांच के घेरे में है।
पुलिस ने आरोपी को पकड़ने के लिए अलग-अलग टीमें बनाकर लगातार छापेमारी कर रही हैं। साथ ही, बैंक अकाउंट से ट्रांजेक्शनों की जांच, फरारी के दौरान उसकी गतिविधियों और फंड संग्रह का भी अध्ययन किया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि यदि आवश्यक हुआ तो आरोपी के खातों और संदिग्ध लेनदेन की भी गहराई से जांच की जाएगी।
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