लखनऊ–देवा रोड : जाम का नया सुपरफास्ट प्रोजेक्ट, बिल्डर, अफसर और अवैध निर्माण -तीनों की रफ्तार एक जैसी

Lucknow : अगर आप लखनऊ से देवा की ओर जाते हुए ट्रैफिक जाम में फंसते हैं, तो घबराइए मत। यह कोई समस्या नहीं, बल्कि विकास है। वह विकास, जो बिना नक्शे के खड़ा होता है, बिना पार्किंग के फलता-फूलता है और बिना कार्रवाई के मुकम्मल हो जाता है।

लखनऊ विकास प्राधिकरण के जोन-5 में इन दिनों विकास और अवैधता का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। यहां बिल्डर और जिम्मेदार अफसर इस कदर गलबहियां डाले नजर आ रहे हैं कि अवैध निर्माण खुद को वैध समझने लगा है।

लखनऊ–देवा मुख्य मार्ग पर बिना स्वीकृत मानचित्र के चार मंजिला व्यावसायिक इमारत अपनी मियाद पूरी करने की ओर है। सूत्र बताते हैं कि यह इमारत ईंट-सीमेंट से कम और “रंगीन कागजों” के सहारे ज्यादा मजबूत बनी है। एलडीए से व्यावसायिक नक्शा स्वीकृत नहीं, लेकिन सहयोग ऐसा कि मानो हर स्लैब पर मौन स्वीकृति की मोहर लगी हो।

नतीजा साफ है—
एक तरफ प्राधिकरण को भारी राजस्व का नुकसान,दूसरी तरफ सड़क को मिलने वाला स्थायी जाम का तोहफा।

पार्किंग?

पार्किंग की जरूरत आखिर किसे है! जब गाड़ियां सीधे मुख्य मार्ग पर खड़ी हों और पूरा रोड ही पार्किंग में बदल जाए, तो अलग से जगह क्यों बर्बाद की जाए?

सील है, मगर काम चालू है

इमारत से कुछ ही दूरी पर एक और पांच मंजिला अवैध इमारत। एलडीए ने इसे सील कर दिया है।
लेकिन यहां सील का मतलब है—
“निर्माण करते रहिए, बस दिखावे के लिए ताला लगा रहेगा।”
बताया जा रहा है कि सीलिंग की कार्रवाई तब हुई, जब पांचवीं मंजिल की स्लैब डाल दी गई। यानी पहले इमारत पूरी होने दो, फिर कार्रवाई का फोटो खिंचवा लो।

भविष्य का ट्रैफिक प्लान ।

लखनऊ–देवा मार्ग पर शत-प्रतिशत व्यावसायिक इमारतें बन रही हैं, वह भी बिना पार्किंग के। ऐसे में आने वाले समय में अगर आमजन को घंटों जाम में रहना पड़े, तो इसे अव्यवस्था नहीं बल्कि पूर्व नियोजित विकास समझा जाए।

कुल मिलाकर,
यह सड़क अब सिर्फ देवा जाने का रास्ता नहीं रही—
यह अफसरशाही की आंखों पर बंधी पट्टी,
बिल्डरों के हौसलों की ऊंचाई
और आम जनता के धैर्य की परीक्षा बन चुकी है।

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