Lucknow : 36 लाख की सड़क, 36 दिन की उम्र, बख्शी का तालाब में ‘विकास’ की परतें उखड़ीं

BKT, Lucknow : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बख्शी का तालाब में विकास के नाम पर हुए निर्माण कार्यों ने एक बार फिर सिस्टम की असलियत उजागर कर दी है। 36 लाख रुपये की लागत से बनी 500 मीटर डामर सड़क महज 36 दिनों में ही उखड़ गई।
सवाल सीधा है—क्या यह सड़क बनी थी या सिर्फ कागज़ों में डाली गई थी?

खबर छपते ही हरकत में आया सिस्टम

जब तक मामला दबा रहा, तब तक सब ठीक था।
जैसे ही दैनिक भास्कर में खबर प्रकाशित हुई, वैसे ही प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया।आनन-फानन में सड़क की मरम्मत शुरू करा दी गई—मानो भ्रष्टाचार पर डामर डालकर सब कुछ ढक दिया जाएगा।

विधायक पहुंचे मौके पर, ठेकेदार-इंजीनियर कटघरे में

मामले की गंभीरता को देखते हुए विधायक योगेश शुक्ला को स्वयं मैदान में उतरना पड़ा।उन्होंने बाना स्थित पुलिया से किसान पथ अंडरपास तक बनी सड़क का निरीक्षण किया।जो तस्वीर सामने आई, वह चौंकाने वाली थी—उखड़ी परतें, बिखरी गिट्टियाँ और उड़ते मानकों की धज्जियाँ। मौके पर विधायक ने ठेकेदार और संबंधित इंजीनियर को जमकर फटकार लगाई और साफ कहा “जनता के टैक्स के पैसे से खिलवाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

सड़क नहीं, सिस्टम फेल हुआ है

विधायक ने दो टूक कहा कि यह सिर्फ सड़क उखड़ने का मामला नहीं, बल्कि लापरवाही, मिलीभगत और जवाबदेही के अभाव का जीता-जागता उदाहरण है।उन्होंने मरम्मत कार्य को तकनीकी मानकों के अनुसार कराने और भविष्य में निगरानी व्यवस्था सख्त करने के निर्देश तो दिए, लेकिन बड़ा सवाल अब भी कायम है—

घटिया निर्माण का जिम्मेदार कौन?
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि निर्माण के दौरान ही शिकायतें की गई थीं, लेकिन “न नगर पंचायत ने सुना” न इंजीनियरों ने ध्यान दिया, न ठेकेदार पर कोई दबाव बनाया गया।

जनता पूछ रही है—
क्या मीडिया में मामला आने के बाद ही जिम्मेदार जागते हैं?
क्या लीपापोती से भ्रष्टाचार के दाग धुल जाएंगे?

जांच या सिर्फ मरम्मत?

क्षेत्रवासियों की मांग साफ है—
मरम्मत से ज्यादा जरूरी है जवाबदेही तय करना।जब तक यह स्पष्ट नहीं होगा कि घटिया सामग्री किसने लगाई, गुणवत्ता की जांच किसने पास की,
और यदि भुगतान हुआ है तो किस आधार पर हुआ, तब तक ऐसे “विकास कार्य” जनता के विश्वास को यूं ही उखाड़ते रहेंगे—ठीक इसी सड़क की तरह।अब देखना यह है कि यह मामला सिर्फ सड़क की मरम्मत तक सिमटता है, या फिर भ्रष्टाचार की परतों को भी उखाड़ा जाएगा।

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