
लखीमपुर खीरी। लखीमपुर खीरी के फरधान क्षेत्र के गांव फत्तेपुर में सात दिवसीय संगीतमय श्री रामकथा के दूसरे दिन बृहस्पतिवार की दोपहर को नरदवल से पधारे पंडित केशवराम शुक्ला ने व्यक्त किए। पृथ्वी पर जब-जब असुरों का आतंक बढ़ा है, तब-तब ईश्वर ने किसी न किसी रूप में अवतार लेकर असुरों का संहार किया है। जब धरा पर धर्म के स्थान पर अधर्म बढ़ने लगता है तब धर्म की स्थापना के लिए ईश्वर को आना पड़ता है। भगवान राम ने भी पृथ्वी लोक पर आकर धर्म की स्थापना की।
उन्होंने कहा कि आज का व्यक्ति ईश्वर की सत्ता को मानने से भले ही इंकार कर दे लेकिन एक न एक दिन उसे ईश्वर की महत्ता को स्वीकार करना ही पड़ता है। कथा के दूसरे दिन कथावाचक पंडित केशवराम शुक्ल ने कहा कि जब अयोध्या में भगवान राम का जन्म होने वाला था तब समस्त अयोध्या नगरी में शुभ शगुन होने लगे। भगवान राम का जन्म होने पर अयोध्या नगरी में खुशी का माहौल हो गया। चारों ओर मंगल गान होने लगे।
उन्होंने कहा भगवान राम ने पृथ्वी लोक पर आकर धर्म की स्थापना की। उनका जन्म असुरों और पापियों का नाश करने के लिए हुआ था। भगवान राम ने बाल्यावस्था से ही असुरों का नाश शुरू कर दिया। संसार में जितने भी असुर उत्पन्न हुए सभी ने ईश्वर के अस्तित्व को नकार दिया और स्वयं भगवान बनने का ढोंग करने लगे लेकिन जब ईश्वर ने अपनी सत्ता की एक झलक दिखाई तो सभी धरा से ही समाप्त हो गए।
उन्होंने कहा मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का जीवन चरित्र अनंत सदियों तक चलता रहेगा। राम कथा में पिता के प्रति, मां के प्रति और भाई के प्रति प्रभु राम का जो स्नेह रहा वह सदा के लिए अमर है।