
घर और माता-पिता का पता नहीं?
कैसे खोजें पूर्वजों के दस्तावेज?
कोलकाता । केंद्रीय चुनाव आयोग द्वारा पश्चिम बंगाल में एसआईआर के लिए जो दस्तावेज मांगे जा रहे हैं। उन दस्तावेजों के कारण लाखों नृत्यांगनाएं एवं यौन कर्मी मतदाता सूची से बाहर होने जा रहे हैं। जिन्हें जन्म कहां हुआ है, वह उन्हें नहीं मालूम। उनके मां-बाप कौन थे, यह भी उन्हें नहीं पता। वह कैसे अपना नाम मतदाता सूची में शामिल करा पाएंगी, या करा पाएंगे।
यौन कर्मियों के लिए मतदाता सूची में नाम जुड़वाना, एक बार पुनः जन्म लेने के समान हो गया है। जो दस्तावेज उनके पास हैं। उन्हें एसआईआर मे मान्य नहीं किया जा रहा है। भारतीय नागरिक होते हुए भी पश्चिम बंगाल में उनसे मतदाता के अधिकार को चुनाव आयोग द्वारा छीना जा रहा है।
उनके पास जो पहचान पत्र हैं।उसे चुनाव आयोग द्वारा नकार दिया गया है। पहले उनका नाम कई बार मतदाता सूचियां में था। अब वह नाम कटने जा रहा है। ऐसी स्थिति में यौन कर्मी महिलाएं कहती हैं। उन्हें रहने के लिए जगह नहीं मिलती है। पहले वोटर कार्ड मिलता था। आधार कार्ड उनका पहचान था। इस धंधे में आने से उनका घर बार छूट गया। जहां जन्म लिया था, वह जगह भी छूट गई।अब संविधान से मतदान और नागरिक होने का जो अधिकार मिला था। वह भी खत्म होने जा रहा है।
भाग्य ने जितना सितम नहीं ठाया, उससे कई गुना ज्यादा अब चुनाव आयोग उनके ऊपर सितम ढाने जा रहा है। हिंसा और उत्पीड़न की शिकार यह महिलाएं जिनके पास दस्तावेज होते भी हैं। वह अपने साथ कभी दस्तावेज नहीं रखती हैं। यदि रखेंगी तो उनका जीना दुभर हो जाएगा।जिनके घर वाले हैं,वह उनके साथ कोई संपर्क नहीं रखना चाहते हैं। इस धंधे में आने के बाद उनका नाम बदल जाता है।
चुनाव आयोग इस तरह से उनकी नागरिकता और मतदान का अधिकार छीनेगा। यह उन्होंने सपने में भी नही सोचा था। भारतीय नागरिक होने के नाते उन्हें बिना किसी भेदभाव के नागरिक अधिकार और मतदान देने की अधिकार संविधान से मिले थे। वह भी यहां पर छीने जा रहे हैं।
कोलकाता में एशिया का सबसे बड़ा रेड लाइट एरिया सोनागाछी है। इसके अलावा कोलकाता और आसपास के जिलों में सैकड़ो स्थानों पर लाखों यौन कर्मी शारीरिक श्रम करके खून के आंसू पीते हुए, किसी तरह से जीवन यापन करने, नृत्य और यौन संबंधी सेवाएं देकर अपने आप को जीवित रखते हैं।अब चुनाव आयोग यह अधिकार भी उनसे छीनने जा रहा है।
अधिकांश महिलाओं का कहना है, उनका जन्म किन से हुआ। इसके बारे में उन्हें पता नहीं होता है। उनके मां-बाप कौन हैं,इसका भी उन्हें पता नहीं है। यहां रोजाना कई लोगों से संपर्क बनाना पड़ता है। किस से गर्भ ठहरा है,यह भी नहीं पता। ना जन्मदाता से कोई जान पहचान है। भगवान की कृपा से जन्म हुआ। अब इस जन्म और वह भारतीय नागरिक हैं। वह कैसे साबित करें।एसआईआर मे सबसे ज्यादा परेशान पश्चिम बंगाल की यौन कर्मी हैं। सोनागाछी जैसे स्थानो पर जन्मा लड़का हो या लड़की हो,सब की समस्या एक ही है।
देखना यह है, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और केंद्रीय चुनाव आयोग यौन कर्मियों की इस समस्या का समाधान किस तरह से करती हैं। इनके बारे में कोई फैसला होता है, नही इसको लेकर इनमें बड़ी दहशत है। मतदाता सूची से इनका नाम निकला, तो उनकी सारी नागरिक सुविधा और नागरिकता खतरे में पड़ जाएगी। वह सुरक्षित रह पाएंगे या नहीं इसको लेकर भी वह भयभीत हैं।













