
Lucknow : किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के ‘स्कूल ऑफ इंटरनेशनल बायोडिज़ाइन’ (SIB SHInE) ने चिकित्सा तकनीक के क्षेत्र में एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। संस्थान द्वारा विकसित एक अभिनव ‘वियरेबल सेंसर पैच’ (पहनने योग्य डिवाइस) को भारत सरकार की ओर से पेटेंट प्रदान किया गया है। यह डिवाइस महिलाओं में स्तन स्वास्थ्य की निगरानी और असामान्यताओं का शुरुआती स्तर पर पता लगाने में क्रांतिकारी साबित होगी।
क्या है यह तकनीक: इस उपकरण को “A Wearable Sensor Patch for Breast Abnormality Monitoring” शीर्षक के तहत पेटेंट मिला है। इसकी मुख्य विशेषताएं हैं
गैर-आक्रामक (Non-invasive): इसमें किसी भी तरह की सर्जरी या सुई की आवश्यकता नहीं होती।
सतत निगरानी: यह डिवाइस शरीर पर रहकर लगातार स्वास्थ्य डेटा मॉनिटर कर सकती है।
प्रारंभिक पहचान: स्तन स्वास्थ्य में होने वाले सूक्ष्म बदलावों को पकड़कर यह गंभीर बीमारियों (जैसे कैंसर) को शुरुआती चरण में पहचानने में मदद करती है।
यह डिवाइस केजीएमयू के एंडोक्राइन सर्जरी विभाग की डॉ. पूजा रमाकांत के नैदानिक मार्गदर्शन और SIB SHInE की फेलो श्रेया नायर (माइक्रोबायोलॉजी विशेषज्ञ) के प्रयासों का परिणाम है। यह प्रोजेक्ट इस बात का बेहतरीन उदाहरण है कि कैसे चिकित्सक और वैज्ञानिक मिलकर जटिल बीमारियों का समाधान निकाल सकते हैं।
केजीएमयू और आईआईटी कानपुर का संयुक्त प्रयास

SIB SHInE कार्यक्रम, केजीएमयू और आईआईटी कानपुर का एक संयुक्त उपक्रम है। इसकी शुरुआत 2022 में प्रो. डॉ. ऋषि सेठी (कार्यकारी निदेशक, SIB SHInE) द्वारा भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से की गई थी।
“यह पेटेंट सहयोगात्मक नवाचार की शक्ति को दर्शाता है। हमारा उद्देश्य चिकित्सा और इंजीनियरिंग विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर मरीजों की उन जरूरतों को पूरा करना है, जिनका समाधान फिलहाल उपलब्ध नहीं है।” -प्रो. डॉ. ऋषि सेठी
कुलपति ने दी बधाई
केजीएमयू की कुलपति प्रो. डॉ. सोनिया नित्यानंद ने टीम को इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि स्वदेशी चिकित्सा उपकरणों का निर्माण ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक बड़ा कदम है और इससे आने वाले समय में रोगी देखभाल की गुणवत्ता में सुधार होगा।













