
कासगंज। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आवारा तथा बेसहारा गोवंशों के लिए प्रत्येक जनपद में गौशालाओं का निर्माण किया गया है, जिसके चलते गोवंशों को सर्दी, गर्मी पर बरसात से बचाव हो सके, साथ ही उनके खाने की व्यवस्था भी हो सके। वहीं, काम कासगंज जनपद में गौशालाओं की स्थिति बद से बदत्तर होती नजर आ रही है।
इसका नजारा बीते कुछ दिनों पूर्व पटियाली कोतवाली क्षेत्र के गांव नवादा स्थित गौशाला में देखने को मिला था, जहां गोवंश की मौत के बाद उसके शव को खुले में छोड़ दिया गया था, जिसे कुत्तों द्वारा नोचने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसके बाद अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लेकर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई भी की थी, लेकिन उसके बाद भी कासगंज जनपद की गौशाला में कोई सुधार नहीं हुआ है।
वहीं, कासगंज के दया फाउंडेशन के संस्थापक आशीष चौहान ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया है कि जनपद के नवीन गल्ला मंडी परिसर में स्थित गौशाला से एक हृदय विदारक स्थिति सामने आई है। यहाँ संरक्षण के नाम पर गोवंश को तड़पने के लिए छोड़ दिया गया है। गौशाला में बुनियादी सुविधाओं के अभाव और प्रशासन की कथित अनदेखी के कारण प्रतिदिन कई गायें दम तोड़ रही हैं। अमानवीय स्थिति और व्यवस्था की पोल गौशाला के भीतर की भयावह स्थिति खोल देती है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, भूखी और प्यासी गायों के लिए चारे और पानी का कोई उचित प्रबंध नहीं है। ठंड के प्रकोप को देखते हुए भी, गौशाला में कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं। इसके साथ ही, चिकित्सा की सुविधा का अभाव होने के कारण बीमार गायों को समय पर दवा या उपचार नहीं मिल पा रहा है, जिससे वे तड़प-तड़प कर मरने को मजबूर हैं। सबसे विचलित करने वाली बात यह है कि जीवित और असहाय गायें भी पक्षी अपना निवाला बना रहे हैं, जो प्रबंधन की संवेदनहीनता का प्रमाण है।
वहीं, दया फाउंडेशन के संस्थापक आशीष चौहान ने इस स्थिति पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए कहा कि यहाँ के जिम्मेदार लोग भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। गौशाला के नाम पर आने वाले फंड का बंदरबांट कर अपना भरण-पोषण किया जा रहा है, जबकि बेजुबान जानवर तिल-तिल कर मर रहे हैं। इन लोगों में दया और धर्म जैसी कोई भावना नहीं बची है।
दफनाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए, संरक्षक विक्रांत चौहान ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि बीमार और अधमरी गायों को भी जिंदा दफनाने जैसी क्रूरता की जा रही है। उन्होंने पशुपालकों से अपील की है कि वे अपने पशुओं को आवारा न छोड़ें और घर पर ही उनकी सेवा करें। साथ ही, उन्होंने शासन-प्रशासन से लिप्त दोषियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।
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