कानपुर: चारे की रकम हड़पने पर कार्रवाई हुई तो शुरु हो गया आंदोलन

  • खुद से जुड़े लोगों के खातों में डाल लिए थे रुपये
  • सीडीओ ने कहा कि फर्म से भूसा खरीदना बाध्यता नहीं

कानपुर देहात। जिले के पंचायत सचिव आंदोलन कर रहे हैं। इस पर अफसरों ने आगे आकर मीडिया से महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। भूसा खरीद में सवाल उठाने वाले पंचायत सचिवों के नेता खुद से जुड़े खातों में रकम डालने पर निलंबित हो चुके है। इसके बाद माहौल बनाकर आंदोलन शुरु कर दिया है। सीडीओ ने साफ कर दिया है कि सचिवों की डिजिटल हाजिरी और कलस्टर आवंटन पर कोई बदलाव नहीं होगा। सिर्फ वाजिब समस्याएं सुनी जाएंगीं।

जिले में 88 गौवंश आश्रय स्थल संचालित हैं। सीवीओ डॉ सुबोध बरनवाल ने बताया कि भूसा की खरीद जेम पोर्टल के माध्यम से फर्म का चयन करके डीएम के अनुमोदन के बाद होती है। प्रमुख सचिव का शासनादेश है कि अगर भूसे की निर्धारित बाजार दर 650 रुपये प्रति कुंतल से अधिक है तो डीएम के अनुमोदन के बाद ही खरीद की जाएगी।

जिले की 88 गौआश्रय आश्रय स्थलों में से केवल 23 में भूसा अनुबंध से खरीदा जा रहा है। 65 ग्राम पंचायतों में अपने स्तर से भूसे की खरीद की जा रही है। जिले में चयनित फर्म से केवल छह पंचातयों में पशु आहार खरीदा जा रहा है। किसी पंचायत पर कोई ऐसा दबाव नहीं है। मनमाने दाम पर भूसा खरीदने के लिए किसी को बाध्य नहीं किया गया है।

ये किया गया था खेल –

पिछले दिनों कुछ पंचायत सचिवों ने भूसा खरीद में धांधली की। साथ ही आश्रय स्थलों के रखरखाव में लापरवाही की गई। इस पर जलिहापुर के पंचायत सचिव अनुराग त्रिवेदी, कसोलर के सचिव राजीव द्विवेदी, रैपालपुर के आकाश कुमार पर निलंबन की कार्रवाई की जा चुकी है।

जांच में पाया गया था कि उक्त सचिवों ने भूसा खरीदने में प्रधान और अपने से जुड़े लोगों के खाते में बिना बिल बाउचर के भुगतान कर दिया। अफसरों का कहना है कि इस पर शिकंजा कसे जाने पर सचिवों ने आंदोलन की राह अपना ली। फिलहाल अफसर बाजिब बात ही मानने को तैयार हैं।

अनुबंधित फर्म से ही भूसा खरीदने की कोई बाध्यता नहीं है। जिलेे की अधिकांश आश्रय स्थलों में पंचायत स्तर से खरीद की जा रही है। आश्रय स्थलों में अव्यवस्था मिलने पर सचिवों पर कार्रवाई भी की गई है। पंचायत सचिवों की जो बाजिब समस्याएं और मुद्दे हैं उनकी जांच कराकर निराकरण कराया जाएगा। ऑनलाइन हाजिरी और कलस्टर आवंटन में कोई हीलाहवाली बर्दाश्त नहीं होगी।

लक्ष्मी एन, सीडीओ

पंचायत सचिवों की तैयारी आरपार की होगी लड़ाई –

कानपुर देहात। विकास भवन के बाहर पंचायत सचिवों ने छह सूत्रीय मांगों को लेकर दूसरे दिन भी धरना दिया। सचिवों ने प्रधानों और अन्य संगठनों से आंदोलन में सहभागिता की अपील की है। शनिवार को सचिव समन्वय समिति के अध्यक्ष अनुराग त्रिवेदी और महामंत्री आशीष कुमार मिश्रा ने कहा कि जिला स्तरीय बैठकें बुलाकर परेशान किया जाता है। सचिवों का कहना है कि उनके अफसर ब्लाक में बैठते हैं। वहां बैठक की जाएं। फील्ड के कर्मचारी को आए दिन बैठक में माती बुलाया जाता है।

वहीं फर्जी रिपोर्टिंग, मनमाने तरीके से कलस्टर आंवटन, टीडीएस, जीएसटी कटौती, झूठी शिकायतों पर बिना पक्ष सुने निलंबन की कार्रवाई, केंद्रीयकृत भूसा और दाना खरीद आदि मांगों के विरोध में अनिश्वितकालीन धरना जारी रहेगा। कहा कि प्रधान और अन्य संगठन भी समर्थन में आ रहे हैं। 7 अप्रैल को सभी डोंगल डीपीआरओ को सौंप दिए जाएंगे। धरने में सोमवार को ग्राम विकास अधिकारी संघ के प्रांतीय महामंत्री रमेश उदैनियां भी शामिल होंगे।

इस मौके पर प्रधान संघ के नेता दिनेश मिश्रा, कर्मचारी नेता महेश गुप्ता, सचिव स्वाती, कीर्ति सिंह, विकास गौतम, प्रदीप शुक्ला, अभिषेक पांडेय, अमित आदि मौजूद रहे।

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