
- उद्योग लगाना आसान नहीं, लाइसेंस लेकर कनेक्शन लेने में आंसू निकल आएंगें
- नमकीन बनाने के छोटे से कारखाने में रोड़े डालते रहे अफसर
- बिजली, खाद्य विभाग और बैंक सबने ने दिखाए अपने रंग
- डीएम से लेकर सीएम तक रजिस्टर्ड डॉक से भेजा पत्र
भास्कर ब्यूरो
कानपुर देहात। उद्योग लगाने के लिए सरकार सुविधाएं देने के तमाम दावे कर रही है लेकिन सरकारी सिस्टम उद्यमी को किस तरह से तबाह कर देता है। ये जानने के लिए झींझक के छेदीलाल राजपूत की कहानी जरूर पढि़ए।
बता दें कि नमकीन बनाने के छोट से कारोबार में हर कदम में अड़चनें झेलनी पड़ीं। तमाम मुश्किलों के बाद सरकारी सिस्टम से लड़ते रहे। अंत में सिस्टम का पेट भरने के लिए उद्यमी छेदीलाल ने गुर्दा बेचने का ऐलान कर दिया। इसके लिए डीएम से लेकर सीएम तक सभी को रजिस्टर्ड डॉक से पत्र भेजा है। साथ ही अपनी छोटी सी फैक्टरी के बाहर गुर्दा सेल का बैनर भी लगा रखा है। उनकी कहानी इस बात का पुख्ता साक्ष्य कि सिस्टम ने उन्हें गुर्दा बेचने के लिए मजबूर कर दिया है।
जीरो टॉलरेंस की बात करने वाली सरकार को आइना दिखाने के लिए झींझक के रहने छेदीलाल राजपूत की कहानी अपने आप में पर्याप्त है। छेदीलाल ने बताया कि नमकीन बनाने का कारोबार वह अपने घर पर करते थे।