
राज्यसभा में गुरुवार को वक्फ संशोधन विधेयक 2025 पर चर्चा के दौरान सदन के नेता जेपी नड्डा ने कहा कि इस विधेयक को लाने का मकसद किसी पार्टी के हित में नहीं बल्कि देश हित में है। वक्फ (संशोधन) विधेयक-2025 का मूल उद्देश्य रिफॉर्म्स लाकर वक्फ की प्रॉपर्टी का उचित मैनेजमेंट करना है। प्रधानमंत्रीनरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में चलने वाली सरकार पूरी तरह से डेमोक्रेटिक नॉर्म्स को फॉलो करके आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि वक्फ संशोधन विधेयक किसी पार्टी के हित में नहीं है बल्कि यह देश के हित में है। उन्होंने चर्चा के दौरान कहा कि क्या वक्फ की संपत्ति सही प्रबंधन नहीं होना चाहिए? इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए क्या कदम नहीं उठाए जाने चाहिए?क्या वे जवाब देह नहींहोने चाहिए।यह विधेयक वक्फ संपत्ति को जवाब देह बनाने के लिए है।
जेपी नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री के’सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ इस मंत्र को लेकर चले हैं और इसको उन्होंने पूरा किया है। मोदी की गरीब कल्याण अन्न योजना से लेकर पीएम आवास योजना, शौचालय… सभी योजनाओं का लाभ हर वर्ग के जरूरतमंदों को मिला है, देश की जनता को मिला है। हम सिर्फ बोलते नहीं, बल्कि सच्ची सेवा करते हैं।इस विधेयक के माध्यम से हमने कोशिश की है कि ज्यादा से ज्यादा मुस्लिम समुदाय का, वक्फ की प्रॉपर्टी का सही से उपयोग हो सके। इस बिल में उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रॉपर्टी सही हाथों में रहे।
उन्होंने कहा कि मिस्त्र में ट्रिपल तलाक 1929 में समाप्त हो गया था, बांगलादेश 1972 में समाप्त हो गया, सिरीया में 1959 में समाप्त हो गया लेकिन भारत ही था जिसमे ट्रिपल तलाक जारी था, प्रधानमंत्री मोदी ने इस प्रथा को खत्म करने का काम किया। यह एक ऐतिहासिक फैसला था। उन्होंने कहा कि मुस्लिम देश भी जब वक्फ बोर्ड की संपत्ति का दुरुपयोग रोकने के लिए प्रबंध कर रहे तो हमारा देश में करने क्या दिक्कतें हैं।
जे पी नड्डा ने कहा कि 1913 से 2013 तक वक्फ के पास 18 लाख हेक्टेयर संपत्ति थी। 2013 से अब तक वक्फ संपत्तियों में 21 लाख हेक्टेयर जमीन जुड़ गई है। इन जमीनों और संपत्तियों के दुरुपयोग को रोकने के लिए हमने 2013 के वक्फ अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। यह समझना महत्वपूर्ण है कि कानून एक विकसित प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार सभी लोकतांत्रिक मानदंडों का पालन कर रही है।
आपने (विपक्ष ने) संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की मांग की थी, और हमने इसका गठन किया। 2013 में जब वक्फ बिल के लिए जेपीसी का गठन किया गया था, तब इसमें केवल 13 सदस्य थे। लेकिन मोदी सरकार के तहत गठित जेपीसी में 31 सदस्य हैं।
जेपीसी ने 36 बैठकें कीं और प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इसकी गतिविधियों पर 200 घंटे से अधिक समय व्यतीत किया गया।
उन्होंने कांग्रेस से अपील की कि वे इस विधेयक का समर्थन करें। इस बिल का मूल मंत्र है कि पारदर्शिता लाना और जवाबदेही तय करना है। क्योंकि 2013-25 के बीच में यह कानून गलत दिशा में था, इससे मुस्लिम भाइयों का बहुत नुकसान हुआ है। इसमें जमीन माफियाओं ने बहुत मलाई खायी है।