
नर्मदापुरम : मध्य प्रदेश के परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने सोमवार को नर्मदापुरम में आयोजित पत्रकार वार्ता में बताया कि ग्रामीण गरीबों को सम्मानजनक और सुनिश्चित रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई “जी राम जी योजना” ग्रामीण भारत में रोजगार की दिशा में नई क्रांति साबित होगी। यह योजना शत-प्रतिशत रोजगार गारंटी की भावना पर आधारित है और महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के सिद्धांतों के अनुरूप तैयार की गई है।
योजना के अंतर्गत प्रत्येक ग्रामीण परिवार को प्रतिवर्ष 125 दिनों का रोजगार दिया जाएगा। वहीं वन क्षेत्रों में कार्यरत श्रमिकों एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के श्रमिकों को 25 दिन का अतिरिक्त रोजगार मिलेगा, जिससे उन्हें कुल 150 दिनों का रोजगार सुनिश्चित होगा।
योजना में पूरी पारदर्शिता रखी गई है। मजदूरी का भुगतान कैशलेस व्यवस्था के तहत सीधे श्रमिकों के बैंक खातों में किया जाएगा। साथ ही फेस आईडी आधारित अटेंडेंस सिस्टम लागू किया जाएगा, जिससे फर्जी हाजिरी और भ्रष्टाचार पर प्रभावी रोक लगेगी। मनरेगा के तहत अब तक 11.74 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, जिनमें से 8.53 लाख करोड़ रुपये मोदी सरकार के कार्यकाल में व्यय हुए हैं। वर्ष 2011-12 में ग्रामीण गरीबी 25.7 प्रतिशत थी, जो 2023-24 में घटकर 4.86 प्रतिशत रह गई है। यह बदलाव सरकार की योजनाओं और ग्रामीण विकास की दिशा में किए गए प्रयासों का परिणाम है।
जी राम जी योजना को 2025-26 की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। बुवाई और कटाई के मौसम में 60 दिन कार्य स्थगित रखा जाएगा, ताकि किसानों को मजदूरों की कमी न हो। कृषि कार्य समाप्त होते ही रोजगार पुनः शुरू किया जाएगा। साथ ही श्रमिकों को हर सप्ताह भुगतान किए जाने का भी प्रावधान है।
मंत्री राव ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि हर जरूरतमंद व्यक्ति को रोजगार मिले और उसकी गरिमा बनी रहे। उन्होंने जनप्रतिनिधियों और मीडिया से योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार की अपील की, ताकि इसका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।










