
झारखंड के शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन ने हाल ही में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि 2017 में तत्कालीन रघुवर दास की “डबल इंजन” सरकार ने प्राइवेट स्कूलों की फीस पर नियंत्रण लगाने के लिए कानून बनाया था, लेकिन वह कानून सिर्फ कागजों तक सीमित रह गया, और इसे लागू नहीं किया गया। सोरेन ने तंज कसते हुए कहा, “शायद उस सरकार की प्राइवेट स्कूलों के साथ कोई सांठगांठ थी, इसलिए यह कानून प्रभावी नहीं हो सका।”
सोरेन ने स्पष्ट किया कि अब वही भाजपा विधायक, जो उस सरकार का हिस्सा थे, अपनी सरकार से प्राइवेट स्कूलों की फीस वृद्धि और अन्य मनमानी पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने कहा, “सदन में इन सवालों का जवाब देते हुए हमने कार्रवाई का भरोसा दिया है। हर जिले के उपायुक्तों को निर्देश दिए गए हैं, और अगर किसी स्कूल के खिलाफ सबूत मिले, तो सख्त कदम उठाए जाएंगे।” उन्होंने यह भी कहा कि गंभीर मामलों में स्कूलों की मान्यता तक रद्द की जा सकती है।
प्राइवेट स्कूलों की मनमानी के खिलाफ यह कार्रवाई पूर्वी सिंहभूम जिले से शुरू हो चुकी है, जहां जिला शिक्षा विभाग ने 73 प्राइवेट स्कूलों को किताबों की बिक्री और फीस संबंधित नियमों के उल्लंघन के आरोप में नोटिस जारी किया है। इन स्कूलों को 3 अप्रैल तक जवाब देने का समय दिया गया है। सोरेन ने कहा, “हमारा उद्देश्य बच्चों और अभिभावकों को राहत देना है। प्राइवेट स्कूल शिक्षा को व्यापार नहीं बना सकते।”
यह कदम झारखंड विधानसभा में हाल ही में उठे सवालों का नतीजा है, जहां भाजपा विधायकों ने फीस वृद्धि और री-एडमिशन शुल्क पर सरकार से जवाब मांगा था। सोरेन ने इसे विडंबना करार देते हुए कहा कि उनकी सरकार पुराने कानूनों को लागू करने के साथ-साथ नई व्यवस्था भी लाएगी, ताकि शिक्षा हर किसी के लिए सुलभ हो सके। इस बयान के बाद प्राइवेट स्कूलों में हलचल मच गई है, जबकि अभिभावक इसे राहत की उम्मीद के रूप में देख रहे हैं।