Jhansi : ‘काँटारहित नागफनी एवं उसके आर्थिक उपयोग’ पर प्रशिक्षण का आयोजन

Jhansi : भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान संस्थान के कार्यवाहक निदेशक डॉ. विजय यादव ने पाँच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम ‘काँटारहित नागफनी एवं उसके आर्थिक उपयोग’ (05–09 जनवरी) का उद्घाटन किया।

इस अवसर पर संस्थान निदेशक ने प्रतिभागियों को काँटारहित नागफनी से परिचित कराते हुए इसकी पशु आहार में उपयोगिता एवं अन्य लाभों के बारे में जानकारी दी। साथ ही संस्थान की चारा तकनीकों एवं गतिविधियों से प्रशिक्षणार्थियों को अवगत कराया।

यह प्रशिक्षण राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान, हैदराबाद तथा भूमि संसाधन विभाग, ग्रामीण विकास मंत्रालय के प्रयोजन एवं वित्त पोषण से आयोजित किया जा रहा है, जिसमें विभिन्न राज्यों के 30 भूमि एवं जल संरक्षण अधिकारी, कृषि उद्यमी एवं उन्नत किसान प्रतिभाग कर रहे हैं।

प्रशिक्षण की रूपरेखा पर जानकारी देते हुए प्रशिक्षण निदेशक डॉ. सीताराम कांटवा ने बताया कि इस प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को काँटारहित नागफनी उत्पादन के विभिन्न आयामों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें चारा नागफनी का उत्पादन, चारे के रूप में उपयोग के साथ-साथ अन्य आर्थिक उपयोग जैसे वीगन लेदर, खाद्य पदार्थ के रूप में नागफनी आदि विषयों पर कक्षा आधारित चर्चा एवं प्रक्षेत्र भ्रमण शामिल हैं।

राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान के डॉ. सुरजीत विक्रमन ने अपने उद्बोधन में काँटारहित नागफनी एवं उसके आर्थिक उपयोग से जुड़ी भविष्य की संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए प्रशिक्षणार्थियों की प्रशिक्षण आवश्यकताओं को रेखांकित किया तथा उनकी क्षमता विकास हेतु आवश्यक प्रमुख बिंदु प्रशिक्षकों के साथ साझा किए।

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में विभागाध्यक्षों, विभिन्न वैज्ञानिकों एवं तकनीकी कर्मचारियों की उपस्थिति रही। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का समन्वय डॉ. सीताराम कांटवा, डॉ. गौरेन्द्र गुप्ता, डॉ. महेंद्र प्रसाद एवं डॉ. सोनू कुमार महावर द्वारा किया जा रहा है।

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