
- मोदी सरकार के नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं यहां पदस्थ चिकित्सक व अफसर
- चिकित्सकों का अभाव व इलाज न होने पर मरीजों का हो रहा है पलायन
झांसी। रेलवे अस्पताल, भारतीय रेलवे द्वारा संचालित चिकित्सा इकाई हैं, जो रेलवे कर्मचारियों और उनके आश्रितों को निःशुल्क प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करती हैं। इनमें स्वास्थ्य इकाइयाँ, उप-मंडल और मंडल अस्पताल शामिल हैं। ये अस्पताल विशेषज्ञ उपचार, आपातकालीन सेवाएँ और आधुनिक उपकरण भी प्रदान करते हैं।
जैसे कि झांसी का उत्तर मध्य रेलवे अस्पताल एक महत्वपूर्ण उदाहरण है, मगर तीन माह से रेलवे अस्पताल के हालात काफी खराब हो चुके हैं। मोदी सरकार के नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। यही कारण है कि चिकित्सकों की कमी और इलाज न होने के कारण मरीजों का पलायन जारी है। इसी वजह से रेलवे अस्पताल के हर वार्ड पूरी तरह से खाली पड़े हैं। इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
देश में अन्य रेल मंडलों से अच्छी श्रेणी में झांसी रेल मंडल को जाना जाता है। इसी मंडल के वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी रेलवे स्टेशन देश का एक महत्वपूर्ण जंक्शन माना जाता है, क्योंकि यहीं से दक्षिण दिशा की ओर जाने वाली सबसे अधिक ट्रेनों का संचालन होता है।
बताया जाता है कि झांसी रेल मंडल में रेल कर्मचारियों की संख्या 17 हजार से अधिक है। पर अब, रेलवे अस्पताल खुद बीमार हो गया है। चिकित्सालय में कई महीने से डॉक्टर ही नहीं हैं। कर्मचारियों को प्राइवेट अस्पताल रेफर किया जा रहा है। चिकित्सक न होने से रेलवे के स्टाफ को इलाज कराना काफी महंगा पड़ रहा है। यदि किसी रेल कर्मचारी को मेडिकल लीव या फिटनेस प्रमाण पत्र बनवाना हो, तो उसे चक्कर लगाना पड़ता है।
मरीजों का इंतजार कर रहे हैं वार्ड में पड़े पलंग
रेलवे अस्पताल के हालात बहुत खराब हैं, क्योंकि यहाँ पर मेडिकल वार्ड, सर्जिकल वार्ड, महिला वार्ड और बच्चा वार्ड हैं। इसके अलावा आईसीयू भी बना है, मगर सभी वार्डों में पड़े पलंग मरीजों का इंतजार कर रहे हैं। तीन माह से रेलवे अस्पताल के वार्ड पूरी तरह से खाली नजर आ रहे हैं। इसका कारण क्या है, इस बारे में किसी के पास स्पष्ट उत्तर नहीं है।
अक्सर सीएमएस चेम्बर से रहते हैं गायब
रेलवे अस्पताल के सीएमएस अक्सर अपने चेम्बर से गायब रहते हैं, क्योंकि आए दिन मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय में जीएम की बैठक, रेलवे बोर्ड की बैठक या डीआरएम की बैठक चल रही होती है। इसी कारण उन्हें अस्पताल का निरीक्षण करने का समय नहीं मिलता। इसके अलावा, अस्पताल में क्या कमी है, इस बारे में भी उन्हें कोई जानकारी नहीं है।
इन बीमारियों का डॉक्टर नहीं है
यदि कोई रेलवे कर्मचारी अपने इलाज के लिए अस्पताल जाता है, तो उससे कहा जाता है कि इस बीमारी का डॉक्टर यहाँ नहीं है, जैसे हृदय रोग, ब्लड प्रेशर, शुगर आदि बीमारियों के विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं।
सरकारी चिकित्सक रेलवे अस्पताल छोड़कर भागे
रेलवे अस्पताल में सरकारी चिकित्सक अब नौकरी छोड़कर भाग रहे हैं। पिछले दिनों आईआरएचएस अस्पताल से एक चिकित्सक नौकरी छोड़कर चला गया है। इसके पहले तीन चिकित्सक भी चले गए हैं, क्योंकि यह अस्पताल अब राम भरोसे है।
रेलवे अस्पताल में 28 चिकित्सक होने चाहिए, पर बमुश्किल 15 चिकित्सक तैनात हैं। जब चिकित्सक ही नहीं रहेंगे, तो रेलवे कर्मचारी का इलाज कौन करेगा? इसी तरह, केवल दस सीएमपी चिकित्सक हैं। अस्पताल में लंबे समय से प्रमुख सर्जन और कई विशेषज्ञ पद रिक्त पड़े हैं, जिनमें बच्चों के चिकित्सक और अन्य विशेषज्ञ भी शामिल हैं।
इन नेताओं की कौन सुनेगा?
एनसीआरएमयू के नेताओं ने मंडल रेल प्रबंधक को एक पत्र भेजा था, जिसमें कहा गया कि मंडलीय रेल चिकित्सालय में पदस्थ वरिष्ठ डॉक्टर जबसे रेल्वे अस्पताल में अपर मुख्य चिकित्सक और अधीक्षक पद पर आए, तब से सुधार हुआ था। इनके जाने के बाद स्थिति बिगड़ गई।
मंडल सचिव अमर सिंह ने कहा कि, “पिछले दिनों मंडल रेल प्रबंधक से हुई स्थाई वार्ता और तंत्र की बैठक में रेलवे अस्पताल का मुद्दा उठाया था, पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। रेलवे अस्पताल में रेलवे कर्मचारियों को ठीक इलाज नहीं मिल रहा है। कुछ कर्मचारी अदालत की शरण में गए हैं और इलाज न मिल पाने के कारण वे जनहित याचिका दायर करने की योजना बना रहे हैं।”
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