
Chirgaon, Jhansi : ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से चिरगांव ब्लॉक के ग्राम पंचायत मुड़ेई में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण कराया गया था। इस स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकों एवं कर्मचारियों के लिए आवास भी बनाए गए, ताकि डॉक्टर गांव में रहकर नियमित रूप से सेवाएं दे सकें। वर्तमान में यहां डॉक्टर संतोष पांडे की तैनाती दर्शाई जा रही है तथा बृजनंदन राजपूत फार्मासिस्ट के पद पर कार्यरत हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है। यह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मुड़ेई से बावरी की ओर जाने वाले मार्ग पर स्थित है, जो गांव से लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर बना हुआ है।
दूरी अधिक होने के कारण वैसे ही मरीजों का आना-जाना कम रहता है, लेकिन सबसे गंभीर समस्या यह है कि चिकित्सक और फार्मासिस्ट नियमित रूप से स्वास्थ्य केंद्र पर उपस्थित नहीं रहते। ग्रामीणों का आरोप है कि डॉक्टर कभी-कभार ही आते हैं और वह भी तब, जब किसी अधिकारी का दौरा प्रस्तावित होता है। बाकी दिनों में स्वास्थ्य केंद्र लगभग बंद ही रहता है। स्थिति यह है कि स्वास्थ्य केंद्र में एक निजी बुजुर्ग व्यक्ति बैठा रहता है, जो परिसर की सफाई करता है और देखरेख करता है। जब चिकित्सक उपस्थित नहीं होते, तो वही व्यक्ति दोपहर 2:30 या 3:00 बजे स्वास्थ्य केंद्र के मुख्य गेट पर ताला लगाकर चला जाता है।
ऐसे में यदि कोई मरीज इलाज के लिए पहुंचता है तो उसे निराश होकर वापस लौटना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि इस पूरे मामले की जानकारी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को भी है, इसके बावजूद आज तक लापरवाह चिकित्सक या फार्मासिस्ट के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। परिणामस्वरूप मुड़ेई, बावरी, सिमथरी, पचार और मडगवा सहित आसपास के गांवों के लोगों को मजबूरी में इलाज के लिए चिरगांव जाना पड़ता है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को नियमित रूप से खोला जाए और यहां चिकित्सक की स्थायी उपस्थिति सुनिश्चित की जाए, ताकि ग्रामीणों को इसका वास्तविक लाभ मिल सके। फिलहाल अस्पताल भवन मौजूद होने के बावजूद स्वास्थ्य सुविधाएं न मिलना ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।













