
जौनपुर। बीते 25 अगस्त क़ो सीवर लाइन के खुले नाले में गिरे युवती क़ो बचाने के चक़्कर में एक युवती व युवकों की करंट लगने की मौत हो गई। मौत के 6 दिन बाद जिले के खेल मंत्री व डीएम सहित तमाम प्रशासनिक अधिकारी मृतक प्राची मिश्रा के घर मुआवजा का चेक देने के लिए पहुंचे।
इस दौरान मृतक की परिजनों ने खेल मंत्री गिरीश चंद्र यादव व डीएम डॉ दिनेश चंद्र से कुछ ऐसा सवाल पूछ दिया कि वो जवाब नहीं दे पाए। मृतक की बहनों ने सवाल करते हुए कहा कि 7:50 लख रुपए से किसी की जिंदगी वापस आ जाएगी। मृतक प्राची मिश्रा के परिजनों मुआवजे की चेक लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद करीब डेढ़ घंटे तक प्रशासनिक अधिकारी उनकी मान- मनौवल करते रहे लेकिन परिजन फिर भी नहीं माने।
बता दें कि बीती रात सदर विधायक व खेल मंत्री गिरीश चंद यादव, डीएम डॉ दिनेश चंद्र व एसपी डॉक्टर कौस्तुभ सहित तमाम प्रशासनिक अधिकारी मृतकों के परिजनों को मुआवजे का चेक देने के लिए उनके घर पहुंचे। जिसके बाद मृतक ई रिक्शा चालक शिवा गौतम और प्रयागराज के रहने वाले मृतक समीर के परिजनों को चेक देते हुए उन्होंने फोटो खिंचवाई।
वहीं इसके बाद जब जिला प्रशासन और खेल मंत्री मृतक प्राचीन मिश्रा के घर चेक देने के लिए पहुंचे तो परिजनों ने चेक लेने से मना कर दिया। जिसके बाद मृतक प्राची मिश्रा की बड़ी बहन ने खेल मंत्री से सवाल खड़ा कर दिया कि प्रशासन एक्शन करने के बजाय मुआवजे की बात कर रहा है। क्या मुआवजे से किसी की जिंदगी की कीमत अदा की जा सकती है। उसने मंत्री से कहा कि क्या 5 लाख, 7 लाख या 20 लाख रु से किसी इंसान की जिंदगी लौटाई जा सकती है। अगर पैसे से किसी की जिंदगी वापस मिल जाए हो तो आप लोग कीमत बताइए मै किसी भी तरह से इंतजाम करके दूंगी. हालांकि, मृतक की बहन के इस सवाल पर सबकी बोलती बंद हो गई है।
मृतक प्राची मिश्रा की बहन साक्षी मिश्रा ने बताया कि मैंने शासन से कोई सहायता राशि नहीं ली हैं। मैं बस शासन से यह मांग करती हूँ कि जो भी दोषी हैं उसके खिलाफ प्रशासन एक्शन ले। जो दोषी नगर पालिका और बिजली विभाग के कर्मचारी हैं। उन पर कड़े से कड़े एक्शन लिया जाए। जो दो अन्य मृतक हैं उनके परिवार वालों ने भी सब कुछ खो दिया है।
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