जालौन : बुलडोज़र कार्रवाई के बीच सीओ का मानवीय कदम, नीचे पड़ी बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की तस्वीर …

जालौन। जालौन जालौन के उरई जेल रोड पर का माहौल तनाव और कानूनी कार्रवाई से भरा हुआ था। उपद्रव और मारपीट के आरोपी माजिद के आलीशान मकान पर बुल्डोज़र गरज रहा था। चारों ओर मलबे की धूल उड़ रहा थी, लोग दूर से तमाशा देख रहे थे, और कानून का पहिया अपने रफ्तार से आगे बढ़ रहा था।

लेकिन इस शोर-शराबे और सख्ती के बीच एक पल ऐसा आया जिसने मौके पर मौजूद हर शख्स के दिल को छू लिया मलबे के बीच, धूल के गुबार में, सीओ सदर अर्चना सिंह की नजर उस सामान पर पड़ी जो टूट-फूट के बीच भी अपनी गरिमा में खड़ा था संविधान निर्माता, भारत रत्न बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की तस्वीर। पल भर के लिए माहौल थम-सा गया। अर्चना सिंह ने तुरंत आगे बढ़कर वह तस्वीर उठाई, मानो सामान से कोई अनमोल धरोहर निकाल रही हों। उन्होंने तस्वीर को दोनों हाथों में संभाला, धूल को हल्के से झाड़ा और उपस्थित कर्मचारियों को सम्मानपूर्वक सौंपते हुए निर्देश दिया धार्मिक और महापुरुषों की तस्वीरें, मूर्तियां और प्रतीकों को हमेशा सम्मान दें। यह सिर्फ कागज़ और फ्रेम नहीं, हमारी विरासत और आत्मा का प्रतीक हैं।”

यह दृश्य इतना भावुक था कि वहां मौजूद पुलिसकर्मी, कर्मचारी और स्थानीय लोग भी सीओ की इस संवेदनशीलता को देख दंग रह गए। सख्त एक्शन और नरम दिल का यह संगम यह साबित कर गया कि कानून के साथ-साथ इंसानियत भी उतनी ही ज़रूरी।

जहां एक ओर प्रशासन ने आरोपी माजिद के अवैध निर्माण को ढहा दिया, वहीं सीओ अर्चना सिंह ने यह दिखा दिया कि कानून के साथ-साथ सम्मान और संवेदना भी ज़िंदा है। उस पल वह सिर्फ एक पुलिस अधिकारी नहीं थीं, बल्कि एक ऐसी संवेदनशील नेता थीं जो अपने पद की गरिमा और इंसानियत दोनों को निभाना जानती हैं। यह खबर जालौन के इतिहास में सिर्फ बुल्डोज़र एक्शन के तौर पर नहीं, बल्कि एक महिला अधिकारी के संवेदनशील दिल की मिसाल के रूप में याद रखी जायेगी ।

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