ईरान के निर्वासित राजकुमार के आह्वान पर देशभर में खामेनेई के खिलाफ प्रदर्शन

तेहरान, ईरान। इस्लामी गणराज्य ईरान की सत्ता में सबसे ताकतवर व्यक्ति और सशस्त्र सेनाओं के सेनापति अयातुल्ला अली खामेनेई का गृहनगर मशहद भी अशांति की लपटों से घिर गया है। 28 दिसंबर से जारी देशव्यापी प्रदर्शन के बीच गुरुवार रात मशहद में खामेनेई के खिलाफ और राजशाही के समर्थन में नारे लगाए गए। सारी रात देशभर में प्रदर्शन के दौरान कई जगह सरकारी इमारतें फूंक दी गईं।

देश में इंटरनेट की सेवाएं रोक दी गई हैं। यही नहीं लैंड लाइन फोन सेवा भी बंद कर दी गई है। दुनिया के कई देशों ने ईरान में चल रहे आंदोलन का समर्थन किया है। निर्वासित राजकुमार रजा पहलवी की आहूत राष्ट्रीय रैली में हिस्सा लेने के लिए लाखों ईरानी नागरिक स्थानीय समयानुसार गुरुवार रात लगभग आठ बजे देशभर की सड़कों पर उतर आए।

ईरान इंटरनेशनल ने देशभर से प्राप्त विभिन्न वीडियो के आधार पर प्रसारित अपनी रिपोर्ट में मौजूदा सूरत-ए-हाल पर विस्तार से चर्चा की है। नेटवर्क मॉनिटरिंग ग्रुप्स के लाइव नेटवर्क मेट्रिक्स ने दावा किया है कि गुरुवार को ईरान में देशव्यापी इंटरनेट ब्लैकआउट हो गया। इस दौरान निर्वासित राजकुमार रजा पहलवी की आहूत राष्ट्रीय रैली में हिस्सा लेने के लिए लाखों ईरानी नागरिक स्थानीय समयानुसार रात लगभग आठ बजे देशभर की सड़कों पर उतर आए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानियों को बहादुर बताते हुए ईरान के अधिकारियों को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा न करने की चेतावनी दी है।

दर्जनों शहरों में कारोबार रहा बंदः कुर्द राजनीतिक पार्टियों के आम हड़ताल का आह्वान पर गुरुवार को सारे देश में प्रदर्शन हुए। कुर्द क्षेत्रों और देश भर के दर्जनों शहरों में दुकानदारों ने अपने कारोबार बंद कर दिए। विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद से कम से कम 36 लोग मारे गए हैं। 2,000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अजेरी बहुसंख्यक शहर तबरीज और अर्दबील भी पहली बार गुरुवार को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन में शामिल हो गए। दिन में प्रदर्शन के दौरान पूर्वी तेहरान में एक सरकारी इमारत को आग लगा दी गई। तेहरान के एक बड़े चौराहे (घोद्स स्क्वायर) पर प्रदर्शनकारियों ने ‘तानाशाह मुर्दाबाद’ के नारे लगाए। मशहद और गोरगन में लोगों ने राजशाही के समर्थन में नारे लगाए। उत्तरी ईरान के सारी में सरकार विरोधी प्रदर्शन हजारों लोगों ने हिस्सा लिया।

स्वीडन और बेल्जियम ने कहा-यह आजादी का संघर्षः स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन ने गुरुवार को ईरानियों के संघर्ष का समर्थन किया। उन्होंने एक्स पर लिखा, “ईरानी नागरिक एक बार फिर जुल्म के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। हम आजादी के लिए उनके संघर्ष का समर्थन करते हैं। इसे हिंसा और ज़ुल्म से चुप नहीं कराया जा सकता।” बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर ने गुरुवार को एक्स पर फारसी में में लिखा, “सालों के दमन और आर्थिक मुश्किलों के बाद बहादुर ईरानी आजादी के लिए खड़े हो रहे हैं। वे हमारे पूरे समर्थन के हकदार हैं। हिंसा से उन्हें चुप कराना मंजूर नहीं है।”

अमेरिका की बारीकी से नजरः एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि अमेरिका तेहरान में बढ़ते सरकार विरोधी प्रदर्शनों पर बारीकी से नजर रख रहा है। इस दौरान एफ15ई के एक स्क्वाड्रन को मिडिल ईस्ट में तैनात किया गया है। अमेरिकी सीनेटर जॉन फेट्टरमैन ने ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों के साथ एकजुटता दिखाने की अपील की है।

एमनेस्टी ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की निंदा कीः एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच ने संयुक्त बयान में 28 दिसंबर से ईरान में प्रदर्शनकारियों पर हो रही दमनात्मक कार्रवाई की निंदा की। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने, डराने और सजा देने के लिए गैरकानूनी बल प्रयोग किया। गोलीबारी की। बड़े पैमाने पर लोगों को गिरफ्तार किया।

चार्ली वाइमर्स की रजा पहलवी से मिलने की अपीलः यूरोपियन संसद के स्वीडिश सदस्य चार्ली वाइमर्स ने गुरुवार को यूरोपियन काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा, यूरोपियन संसद की अध्यक्ष रॉबर्टा मेट्सोला और विदेश मामलों के प्रतिनिधि काजा कैलास से ईरानी लोगों की बात सुनने और निर्वासित राजकुमार रजा पहलवी से मिलने की अपील की। इसके अलावा ऑस्ट्रियाई विदेश मंत्री बीट मेनिल-रीसिंगर ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर ईरान की क्रूर कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने ईरान सरकार से संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार दायित्वों का पालन करने का आग्रह किया।

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