ईरान में सत्ता पलट की मांग! रियाल के गिरने से लोगों का फूटा गुस्सा, क्या विरोध की आग में जल जाएगी इस्लामिक सरकार

Iran Protest : ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने देश के नागरिकों से कहा है कि वह विदेशी प्रतिबंधों और आर्थिक दबाव के सामने एकजुट रहें। बुधवार को यह अपील उस समय आई है, जब दक्षिणी फार्स प्रांत में सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की, जिन्होंने एक स्थानीय सरकारी इमारत में घुसने का प्रयास किया था। यह प्रदर्शन पिछले तीन दिनों से शांतिपूर्ण था, लेकिन चौथे दिन हिंसक हो गया है। अलजजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, लोरेस्टान जैसे पश्चिमी प्रांत में कम से कम एक पैरामिलिट्री अधिकारी की मौत हो चुकी है। रविवार को राजधानी तेहरान में दुकानदारों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया, जिससे शहर की दुकानें बंद रहीं।

ईरान में मुद्रा रियाल गिरने से भूचाल

भारी अमेरिकी और पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण ईरान की मुद्रा रियाल का मूल्य गिर रहा है। वर्तमान में, एक डॉलर की कीमत करीब 14.2 लाख रियाल तक पहुंच गई है, जो एक साल पहले लगभग 8.2 लाख रियाल थी। इस गिरावट का सीधा प्रभाव महंगाई पर पड़ा है। देश में महंगाई दर 50 प्रतिशत से ऊपर पहुंच चुकी है, और खाद्य पदार्थों की कीमतें 70 प्रतिशत से अधिक बढ़ गई हैं। अमेरिकी प्रतिबंधों ने 2018 से ही ईरान की तेल निर्यात, विदेशी निवेश और मुद्रा भंडार को नुकसान पहुंचाया है।

ईरान में लोगों का क्यों फूटा गुस्सा?

  • मुद्रा का अवमूल्यन: डॉलर के मुकाबले रियाल की कीमत में भारी गिरावट, जिससे विदेशी सामान खरीदना मुश्किल हो गया है।
  • महंगाई: खाद्य पदार्थ और रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की कीमतें आसमान छू रही हैं।
  • आर्थिक स्थिति: मध्यम वर्ग और छोटे व्यापारी सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। छोटे व्यापारियों का कारोबार बंद हो रहा है।
  • ऊर्जा और पानी की आपूर्ति: बिजली कटौती, ईंधन की कमी और जल संकट ने उद्योग और नागरिक जीवन को प्रभावित किया है।

पूरे देश में आर्थिक तंगी के खिलाफ विरोध

रविवार को शुरू हुआ विरोध अब पूरे देश में फैल चुका है। सबसे पहले तेहरान के ग्रैंड बाजार में दुकानदारों ने रियाल की गिरती कीमत और बढ़ती महंगाई के विरोध में कारोबार बंद किया। धीरे-धीरे यह आंदोलन छात्र, युवा और आम नागरिकों तक पहुंच गया है। इस आंदोलन में हिंसक झड़पें भी हो रही हैं। कई शहरों जैसे इस्फहान, यज़्द, जंजन, कूहदश्त और फासा में प्रदर्शनकारियों ने सड़कें बंद कर दी हैं।

राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा है कि देश की अर्थव्यवस्था का प्रबंधन करने में सरकार को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने विदेशी प्रतिबंधों को दोषी ठहराते हुए देशवासियों से शांति और संयम बनाए रखने की अपील की।

ईरान सरकार प्रदर्शन को सख्ती से दबाने के लिए पहले से ही कुख्यात है। सरकार के प्रवक्ता फातेमा मोहाजेरानी ने कहा कि सरकार बातचीत और संवाद के लिए ‘डायलॉग मेकानिज्म’ स्थापित करेगी और शांतिपूर्ण प्रदर्शन को मान्यता देती है। लेकिन, वहीं शीर्ष अभियोजक मोहम्मद मोवाहेदी-अज़ाद ने चेतावनी दी है कि यदि विरोध प्रदर्शन “सामाजिक सुरक्षा के लिए खतरा” बनते हैं या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हैं, तो उनके खिलाफ “कानूनी और निर्णायक” कार्रवाई की जाएगी।

आर्थिक और राजनीतिक संकट का विस्तार

  • मुद्रा का गिरना: 2025 तक ईरान की रियाल डॉलर के मुकाबले लगभग 50% गिर चुकी है।
  • महंगाई: दिसंबर में महंगाई दर लगभग 50% पहुंच गई है।
  • खाद्य वस्तु महंगाई: खाद्य पदार्थों की कीमतें एक साल में 70% से अधिक बढ़ चुकी हैं।
  • आम लोगों का जीवन: वेतन और खर्च के बीच भारी अंतर के कारण जीवन बहुत कठिन हो गया है।
  • आयात और निर्यात: 2018 के अमेरिकी प्रतिबंधों ने देश की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है।
  • ऊर्जा संकट: बिजली कटौती, ईंधन की कमी, और पानी की आपूर्ति में कमी ने जीवन को और कठिन बना दिया है।

ईरान की सरकार अभी भी मिसाइल और रक्षा प्रणालियों के निर्माण पर केंद्रित है, जबकि जनता का भरोसा प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से टूट रहा है। क्विंसी इंस्टीट्यूट के डिप्टी डायरेक्टर त्रिता पारसी ने कहा कि जब राष्ट्रपति ही कहें कि वे समस्याओं को हल करने में असमर्थ हैं, तो जनता का विश्वास और टूट जाता है।

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