पड़ताल : KGMU ‘लव जिहाद’ के पीछे जाकिर नाइक का सिंडिकेट? STF की रडार पर ‘कट्टरपंथी’ नेटवर्क

  • लखनऊ से लेकर मलेशिया तक कड़ी जोड़ने की तैयारी

लखनऊ : उत्तर प्रदेश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) से शुरू हुआ ‘धर्मांतरण कांड’ अब एक बड़े अंतरराष्ट्रीय खतरे की ओर इशारा कर रहा है। मीडिया सूत्रों के मुताबिक, गिरफ्तार डॉक्टर रमीजुद्दीन (उर्फ रमीज मलिक) केवल एक अपराधी नहीं, बल्कि एक सुनियोजित कट्टरपंथी विचारधारा का मोहरा हो सकता है, जिसके तार भारत से प्रतिबंधित जाकिर नाइक के नेटवर्क से जुड़ते दिख रहे हैं।

जांच एजेंसियों और एसटीएफ के हाथ कुछ ऐसे इनपुट्स लगे हैं जो इस मामले को बेहद संवेदनशील बना देते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, रमीजुद्दीन के मोबाइल और लैपटॉप से कुछ ऐसी सामग्री और लिंक मिले हैं जो जाकिर नाइक की प्रतिबंधित ‘इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन’ की विचारधारा से मेल खाते हैं।
यह अंदेशा जताया गया है कि केजीएमयू परिसर के अंदर एक ऐसा ‘सिंडिकेट’ सक्रिय हो सकता है जो रमीज जैसे लोगों को संरक्षण देता है और धर्मांतरण के लिए मानसिक दबाव बनाने की तकनीक सिखाता है।

जांच में खुलासा हुआ है कि रमीज ने इससे पहले भी एक अन्य हिंदू महिला डॉक्टर का धर्मांतरण कराया था। एजेंसियों को संदेह है कि यह कोई ‘इत्तेफाक’ नहीं, बल्कि जाकिर नाइक द्वारा प्रेरित ‘मिशन’ का हिस्सा है।
एसटीएफ यह पता लगा रही है कि क्या रमीजुद्दीन या उसके करीबियों को जाकिर नाइक से जुड़े विदेशी संगठनों से किसी भी तरह की आर्थिक मदद मिल रही थी। क्या केजीएमयू जैसे संस्थानों में ‘सॉफ्ट टारगेट’ (शिक्षित हिंदू युवतियां) को चुनने के लिए कोई विशेष प्रशिक्षण दिया गया था?
रमीज के पिता सलीमुद्दीन (जिन पर चार शादियों और धर्मांतरण में सहयोग का आरोप है) के संपर्कों की भी जांच की जा रही है कि वे किन बाहरी कट्टरपंथी तत्वों के संपर्क में थे।

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अब ‘लव जिहाद’ के लिए अशिक्षित लोगों के बजाय डॉक्टर और इंजीनियर जैसे पेशेवरों का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि समाज के उच्च वर्ग में सेंध लगाई जा सके। जाकिर नाइक के लोग अक्सर सोशल मीडिया और गुप्त मीटिंग्स के जरिए इसी तरह के पढ़े-लिखे युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलते हैं।

जाकिर नाइक वर्तमान में मलेशिया में शरण लिए हुए है और भारत सरकार लगातार उसके प्रत्यर्पण की कोशिश कर रही है। लखनऊ के इस प्रकरण ने यह साबित कर दिया है कि उसकी ज़हरीली विचारधारा अभी भी देश के भीतर सक्रिय है। एसटीएफ की यह जांच आने वाले समय में कई और सफेदपोश चेहरों को बेनकाब कर सकती है जो ‘जाकिर नेटवर्क’ के स्लीपर सेल के रूप में काम कर रहे हैं।

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