इंदौर में दूषित पानी से मौतें: उच्च न्यायालय ने शहर की स्वच्छता छवि पर जताई चिंता

इंदौर : मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से हुई मौतों और बीमारी के मामले में उच्च न्यायालय ने बेहद तल्ख टिप्पणी की है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने मंगलवार को मामले की सुनवाई करते हुए साफ शब्दों में कहा है कि देश के सबसे स्वच्छ शहर में ऐसा हो रहा, बहुत दुखद है। देश ही नहीं विदेश तक में शहर की छवि बिगड़ी है। देश का नाम खराब हो रहा है।

दरअसल, इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित जल पीने से हुई मौतों को लेकर उच्च न्यायालय में तीन जनहित याचिकाएं दायर की गई थीं। याचिकाओं में मरीजों के निशुल्क उपचार, मृतकों के परिजनों को पर्याप्त मुआवजा और दोषी अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने जैसी मांगें की गई हैं। पिछली सुनवाई में उच्च न्यायालय के निर्देश पर शासन ने स्टेटस रिपोर्ट पेश की थी। मंगलवार को उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ में सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई हुई। इसमें दूषित पानी से जुड़ा मामला प्रमुख रूप से उठाया गया। उच्च न्यायालय ने सुनवाई के दौरान कहा कि इस घटना ने शहर की छवि को बहुत नुकसान पहुंचाया है। इंदौर देश का सबसे स्वच्छ शहर है, लेकिन अब दूषित पेयजल की वजह से यह पूरे भारत में चर्चा का विषय बन गया है।

अदालत ने कहा कि सिर्फ इंदौर ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में स्वच्छ पानी जनता का मौलिक अधिकार है। इस अधिकार से किसी भी हाल में समझौता नहीं किया जा सकता। यदि भविष्य में जरूरत पड़ी तो दोषी अधिकारियों पर सिविल और क्रिमिनल लायबिलिटी तय की जाएगी। अदालत ने संकेत दिए कि यदि पीड़ितों को मुआवजा कम मिला है तो उस पर भी उचित निर्देश जारी किए जाएंगे। साथ ही उच्च न्यायालय ने दूषित पानी से प्रभावित मरीजों को मुफ्त इलाज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं और पूरे मामले में हुई मौतों को लेकर विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी है।

हाई कोर्ट ने कहा कि यह मामला सिर्फ इंदौर नहीं पूरे प्रदेश का है। हम चाहते हैं कि मुख्य सचिव इस मामले में खुद शासन का पक्ष अदालत के सामने रखें। मामले की अगली सुनवाई 15 जनवरी को होगी। इसमें मुख्य सचिव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं। अदालत ने मामले से जुड़ी खबरों का जिक्र करते हुए यह भी कहा कि खबरें बता रही हैं कि पूरे शहर में दूषित पानी वितरित हो रहा है। यह चिंता का विषय है।

गौरतलब है कि इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित जल संकट बना हुआ है। मंगलवार को भी उल्टी-दस्त के 38 नए मामले सामने आए हैं, जबकि क्षेत्र में दूषित पानी से अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है। अभी अस्पतालों में 110 मरीज भर्ती हैं। इनमें से 15 का आइसीयू में इलाज चल रहा है।

इस बीच, मंगलवार को भोपाल से इंदौर पहुंची स्टेट इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम (एसआईडीएसपी) टीम के प्रमुख डा. भागवत भार्गव ने कहा कि भागीरथपुरा जैसा स्वास्थ्य संकट मध्य प्रदेश में पहली बार सामने आया है। उन्होंने बताया कि इतने कम समय में इतने सीमित क्षेत्र में बड़ी संख्या में मरीजों का सामने आना और महामारी (एपिडेमिक) जैसी स्थिति बनना बेहद असाधारण और चिंताजनक है।

इधर, मामले को लेकर इंदौर में कांग्रेस का प्रदर्शन जारी है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ भागीरथपुरा पहुंचे हैं। वे मृतक जीवन लाल और गीता बाई के परिजनों से मिलने जा रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की। इस दौरान सिंघार और पुलिस के बीच बहस भी हुई। इसके बाद कांग्रेस नेता मृतक अशोक लाल पवार के घर पहुंचे। यहां जीतू पटवारी ने कहा कि देश-विदेश में स्वच्छता के नाम पर पहचान बनाने वाले इंदौर की छवि इस मामले से धूमिल हुई है। पटवारी ने दावा किया कि यहां 15-17 नहीं बल्कि कई लोगों की मौत हुई है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं इंदौर के प्रभारी मंत्री हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि वे क्या कर रहे हैं? पटवारी ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और महापौर पुष्यमित्र भार्गव से तुरंत इस्तीफा देने की मांग की। जीतू पटवारी ने यह भी पूछा कि इंदौर के सांसद क्या कर रहे हैं और पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन से आग्रह किया कि वे इस मुद्दे पर कुछ कहें। सामने आएं। उन्होंने कहा कि यह राजनीति का विषय नहीं, बल्कि सीधे तौर पर जनता से जुड़ा गंभीर मामला है। पटवारी ने सभी लोगों से अपील की कि वे सच्चाई का साथ दें और इस मुद्दे को गंभीरता से लें। जिनके घर मौतें हुई हैं, उन्हें सरकार दो लाख रुपये मुआवजा दे रही है। ये बहुत कम है। मृतकों के हर परिवार को एक-एक करोड़ रुपये दिया जाना चाहिए। इसके अलावा कांग्रेस ने शाम को कैंडल मार्च और हर वार्ड में रैली निकालने की घोषणा की है।

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