
अमेरिकी वाणिज्य सचिव की टिप्पणियों पर भारत ने बड़ा और स्पष्ट बयान जारी किया है। भारत सरकार ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्यापार समझौते के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कोई फोन नहीं किया था। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि मीडिया में इन चर्चाओं को जिस तरह पेश किया गया है, वह वास्तविक तथ्यों से मेल नहीं खाता।
भारत ने कहा कि भारत और अमेरिका 13 फरवरी 2025 को ही द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत के लिए प्रतिबद्ध हो चुके थे। इसके बाद से दोनों देशों के बीच संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार समझौते को लेकर कई दौर की बातचीत हुई है। कई अवसरों पर दोनों पक्ष समझौते के काफी करीब भी पहुंचे, लेकिन खबरों में इन चर्चाओं का जो विवरण दिया गया है, वह सटीक नहीं है।
विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि भारत और अमेरिका दो पूरक अर्थव्यवस्थाएं हैं और दोनों देश पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के इच्छुक हैं। संयोगवश, वर्ष 2025 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच आठ बार फोन पर बातचीत हुई है, जिनमें व्यापक द्विपक्षीय साझेदारी के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। हालांकि, यह स्पष्ट किया गया कि पीएम मोदी ने व्यापार समझौते को लेकर विशेष रूप से ट्रंप को कोई कॉल नहीं किया था।
भारत की ऊर्जा नीति किसी दबाव में नहीं बदलेगी
अमेरिका के प्रस्तावित 500 फीसदी टैरिफ बिल को लेकर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि ऊर्जा स्रोतों के मुद्दे पर भारत का रुख पूरी तरह स्पष्ट है। भारत वैश्विक बाजार के बदलते हालात और अपने 1.4 अरब नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न देशों से सस्ती और भरोसेमंद ऊर्जा प्राप्त करने की नीति पर चलता है।
उन्होंने दो टूक कहा कि भारत की ऊर्जा नीति किसी भी दबाव में नहीं बदलेगी। सरकार का मुख्य उद्देश्य देशवासियों को किफायती ऊर्जा उपलब्ध कराना है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए दुनियाभर के बाजारों पर लगातार नजर बनाए हुए है।













