
Waqf Bill : भारतीय यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) ने वक्फ संशोधन बिल 2025 पर लोकसभा में चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी की अनुपस्थिति पर नाराजगी व्यक्त की है। समस्त केरल जेम-इयथुल उलमा ने इसे “काला धब्बा” करार देते हुए इसकी तीव्र आलोचना की। इन संगठनों का मानना है कि प्रियंका गांधी को इस महत्वपूर्ण विधेयक पर अपनी राय रखनी चाहिए थी, लेकिन उनकी अनुपस्थिति से उनकी प्रतिबद्धता पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
राहुल गांधी की चुप्पी पर भी उठे सवाल
समस्त केरल जेम-इयथुल उलमा के मुखपत्र “सुप्रभातम्” में 4 अप्रैल को प्रकाशित एक लेख में राहुल गांधी की चुप्पी पर भी सवाल खड़े किए गए हैं। लेख में यह कहा गया कि विपक्ष का यह कर्तव्य था कि वे इस बिल के खिलाफ अपनी आवाज उठाते, लेकिन कांग्रेस नेता इस मुद्दे पर मौन बने रहे। हालांकि, लेख में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और वामपंथी दलों की भारत गठबंधन के तहत एकजुटता की सराहना की गई, जिन्होंने संसद में इस बिल के खिलाफ विरोध दर्ज कराया था।
विपक्ष का विरोध और सरकार का रुख
वक्फ संशोधन बिल 2025 पर कांग्रेस के राज्यसभा सांसद सैयद नसीर हुसैन ने कड़ा विरोध जताया। उन्होंने इसे “असंवैधानिक और अन्यायपूर्ण” बताते हुए कहा कि यह बिल लक्षित विधेयक है। हुसैन ने यह भी कहा कि यह संवैधानिक दृष्टि से समस्या उत्पन्न करता है। दोनों सदनों में इस बिल पर विस्तृत चर्चा के बाद भी सरकार अपने रुख पर अड़ी रही, और अंततः इस बिल को पास कर दिया गया।
वक्फ संशोधन बिल 2025 का उद्देश्य
वक्फ संशोधन बिल 2025 का मुख्य उद्देश्य 1995 के वक्फ अधिनियम में सुधार करना है। इस बिल का मकसद वक्फ संपत्तियों के प्रशासन और प्रबंधन में सुधार लाना है। इसके तहत वक्फ बोर्ड की कार्यक्षमता को बढ़ाने का प्रयास किया गया है, ताकि वक्फ संपत्तियों का बेहतर उपयोग किया जा सके और उनका दुरुपयोग रोका जा सके।