
Indian Army Day : आज का दिन भारतीय सेना के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया है। देश के गुलाबी नगर जयपुर के लिए यह विशेष अवसर और गौरव का क्षण है, क्योंकि 78वां भारतीय सेना दिवस (Army Day) आज 15 जनवरी को पूरे देश में धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस बार का खास पहलू यह है कि जयपुर में आयोजित यह सेना दिवस परेड पहली बार किसी सैन्य छावनी के बंद घेरे से बाहर निकालकर आम जनता के बीच लाई गई है, जो देश में सैनिकों की बहादुरी, समर्पण और आधुनिक सेना की ताकत का प्रतीक बन गई है।
आखिर 15 जनवरी भारतीय सेना के लिए खास क्यों है? हर साल 15 जनवरी को भारतीय सेना दिवस मनाने का प्रमुख कारण है कि इसी दिन साल 1949 में तत्कालीन ब्रिटिश कमांडर-इन-चीफ जनरल फ्रांसिस बुचर से भारतीय सेना का नियंत्रण भारतीय सेना के पहले कमांडर-इन-चीफ, फील्ड मार्शल के.एम. करियप्पा ने संभाला था। यह दिन भारतीय सेना की स्वायत्तता, उसकी स्वतंत्रता का प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। यह वह ऐतिहासिक क्षण था, जब भारत ने अपने सैनिकों की कमान अपने हाथों में ली और सेना की ताकत का परिचय दिया। सेना दिवस का यह पर्व भारतीय सैनिकों की वीरता, पराक्रम, समर्पण और देशभक्ति का सम्मान करने का अवसर है, जिसमें देश के नागरिक अपने सैनिकों को नमन करते हैं।

भारतीय सेना का इतिहास बहुत पुराना और समृद्ध है। प्राचीन काल से ही भारतीय युद्ध कला और सेनाएँ प्रसिद्ध रही हैं। स्वतंत्रता से पहले नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने ‘आजाद हिंद फौज’ की स्थापना कर देश में राष्ट्रीय भावना जागरूक की। ब्रिटिश काल के दौरान भारतीय सेना का आधुनिक रूप विकसित हुआ। 15 जनवरी 1947 को भारत ने ब्रिटिश सेना से स्वतंत्रता प्राप्त की, और 15 जनवरी 1949 को पहली बार भारतीय सेना के प्रमुख के रूप में फील्ड मार्शल के.एम. करियप्पा ने सेना की कमान संभाली, जो भारत की सेना की स्वायत्तता का प्रतीक है।
आज की भारतीय सेना में लगभग 12.5 लाख सक्रिय जवान हैं, जो देश की सीमाओं की रक्षा में जुटे हैं। सेना की सात कमांड्स और विभिन्न रेजिमेंट्स- जैसे सिख, राजपूत, गोरखा, मारवाड़ी, गुजराती देश की विविधता का परिचायक हैं। भारतीय सेना का नेतृत्व चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल करता है। यह सेना अपनी अद्भुत बहुमुखी क्षमताओं के लिए जानी जाती है। भारतीय सेना का मुख्य कार्य देश की सीमाओं की रक्षा, आंतरिक सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और सामरिक अभियानों में सक्रिय रहकर देश की स्वतंत्रता और संप्रभुता को बनाए रखना है।
सेना की प्राथमिक भूमिका है सीमा की रक्षा। इसके साथ ही, यह आंतरिक सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी अभियानों, आपदा प्रबंधन, शांति स्थापना मिशनों और मानवीय सहायता में भी अहम भूमिका निभाती है। भारतीय सेना ने अपने पराक्रम और साहस का परिचय कई युद्धों में दिया है- जैसे 1947, 1965, 1971, 1991 के युद्ध और देश की संप्रभुता का सम्मान बढ़ाया है। इसके अतिरिक्त, सेना ने ऑपरेशंस, सीमा पर तैनाती, आतंकवाद से लड़ाई, सर्जिकल स्ट्राइक और मानवीय आपदा राहत कार्य किए हैं।
इस साल का सेना दिवस समारोह जयपुर के लिए खास है। पहली बार सेना ने अपनी वार्षिक परेड को किसी सैन्य छावनी के बंद घेरे से बाहर निकालकर जनता के बीच लाने का निर्णय लिया है। यह परेड गुरुवार सुबह 10:00 बजे जयपुर के जगतपुरा स्थित महल रोड पर आयोजित की जा रही है। यह आयोजन न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश के लिए ऐतिहासिक है, क्योंकि इससे जनता को सेना की ताकत, उसकी तैयारियों और आधुनिक युद्ध कौशल का प्रत्यक्ष अनुभव मिलता है।
इस परेड का सबसे बड़ा आकर्षण है ‘भैरव बटालियन’, जो पहली बार आम जनता के सामने आई है। यह यूनिट आधुनिक हाइब्रिड युद्ध की बदलती प्रकृति को ध्यान में रखते हुए गठित की गई है। यह बटालियन विशेष रूप से ड्रोन आधारित युद्ध, मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस और पैरास्पेशल फोर्सेस के बीच एक महत्वपूर्ण ‘ब्रिज’ का काम करती है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के अनुभवों से प्रेरित होकर इस बटालियन का गठन किया गया, जो कठिन और दुर्गम इलाकों में दुश्मन के ठिकानों पर सटीक और त्वरित हमला करने में सक्षम है। इसकी इस विशेषता ने इसे बहुत अलग और प्रभावशाली बना दिया है।
सेना दिवस का यह आयोजन आधुनिक भारतीय सेना के स्वरूप और उसकी क्षमताओं का प्रदर्शन है। यह दिन सैनिकों की बहादुरी और राष्ट्रभक्ति का सम्मान करने का अवसर है।
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