
ISRO PSLV C62 Successful Launch : नए साल में भारत ने अपने पहले स्पेस मिशन की शुरुआत की, लेकिन मिशन के दौरान एक अप्रत्याशित घटना ने सबका ध्यान खींचा। यह ISRO का 62वां PSLV (पृथ्वी लांच वाहन) मिशन था, जिसके तहत 16 सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में भेजा गया था। लेकिन, रास्ते में ही एक रॉकेट रास्ता भटक गया, जिससे मिशन का पूरा कार्यक्रम प्रभावित हुआ है।
मिशन का प्रारंभ और रॉकेट का भटकाव
सुबह 10:17 बजे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से इस मिशन का शुभारंभ हुआ। इसरो ने बताया कि लॉन्च के दौरान, पहले और दूसरे चरण का प्रदर्शन सामान्य रहा। लेकिन तीसरे चरण के अंत में, रॉकेट की घूमने की गति में असामान्य गड़बड़ी देखी गई, जिसके कारण वह अपने निर्धारित रास्ते से भटक गया। ISRO ने इस घटना की जानकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से दी है और कहा है कि वे डेटा का विश्लेषण कर रहे हैं।
ISRO प्रमुख ने कहा- रास्ता भटक गया
ISRO के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने कहा, “पहले और दूसरे चरण का प्रदर्शन सामान्य था, लेकिन तीसरे चरण के आखिर में रॉकेट की घूमने की गति में अधिकता दिखी, जिसके कारण वह रास्ता भटक गया। हम इस गड़बड़ी का विश्लेषण कर रहे हैं।”
PSLV की विश्वसनीयता और इस मिशन का महत्व
PSLV भारत का विश्वसनीय और भरोसेमंद लॉन्च वाहन माना जाता है। इससे पहले चंद्रयान-1, मंगलयान और आदित्य-L1 जैसे महत्वपूर्ण मिशन सफलतापूर्वक लॉन्च किए गए हैं। यह PSLV का 64वां उड़ान थी और भारत का यह 9वां कॉमर्शियल मिशन था, जो अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट्स के निर्माण और लॉन्च के लिए किया गया था।
प्राइवेट सेक्टर का बड़ा हिस्सा
यह मिशन भारत के निजी स्पेस सेक्टर के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पहली बार किसी भारतीय निजी कंपनी ने PSLV मिशन में इतनी बड़ी हिस्सेदारी ली है। इस मिशन को न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) ने संचालित किया, जो ISRO की कॉमर्शियल इकाई है।
सटीक निगरानी के लिए जरूरी अन्वेषा सैटेलाइट
मिशन में शामिल एक खास सैटेलाइट है- अन्वेषा। इसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने विकसित किया है। यह एक एडवांस्ड इमेजिंग सैटेलाइट है, जिसका उद्देश्य सटीक निगरानी और मैपिंग करना है। यह जंगली इलाकों, जंगलों या बंकरों में छिपे दुश्मनों की तस्वीरें भी खींच सकता है।
भारत की पहली ऑर्बिटल AI इमेज सैटेलाइट
इस मिशन का सबसे खास सैटेलाइट MOI-1 है। यह भारत की पहली ऑर्बिटल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इमेज लैब है, जिसे हैदराबाद की स्टार्टअप कंपनियों टेक मी टू स्पेस और ईऑन स्पेस लैब ने मिलकर विकसित किया है। MOI-1 सैटेलाइट एक ‘स्पेस क्लाउड’ के रूप में काम करेगा, जिससे लोग सीधे सैटेलाइट पर अपने एक्सपेरिमेंट्स कर सकेंगे।
हालांकि, इस घटना ने मिशन की सफलता पर सवाल खड़े किए हैं, लेकिन ISRO ने कहा है कि वे डेटा का विश्लेषण कर रहे हैं और आवश्यक कदम उठाएंगे। भारत का यह पहला बड़ा स्पेस मिशन प्रारंभिक बाधाओं के बावजूद भविष्य के लिए नई संभावनाओं और नवाचारों का मार्ग प्रशस्त करता रहेगा।
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