जाति, संप्रदाय और मत के नाम पर बंटे तो होगा बांग्लादेश जैसा हाल : CM योगी

प्रयागराज: संसार और परिवार की मोह-माया छोड़कर संन्यासी और साधु-संत माघ मेले में पहुँच चुके हैं। 3 जनवरी से शुरू हुआ यह श्रद्धा और आस्था का महासंगम 15 फरवरी तक चलने वाला है। संगम की पवित्र रेत पर इस समय आध्यात्मिक माहौल चरम पर है।

इस बार मेला प्रशासन ने विशेष रूप से संवेदनशील और सुव्यवस्थित इंतजाम किए हैं, ताकि उम्र या शारीरिक स्थिति किसी के लिए भी संगम स्नान में बाधा न बने।

महामाघ मेला: 75 वर्षों में दुर्लभ संयोग

सनातन धर्म में माघ मास को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। 75 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है कि इसे साधारण माघ नहीं, बल्कि ‘महामाघ मेला’ कहा जा रहा है। शास्त्रों के अनुसार, माघ महीने में गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम में स्नान मोक्षदायी फल देता है।

सीएम योगी का आस्था और सनातन धर्म पर संदेश

सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वह खुद संगम में डुबकी लगाने के लिए उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि पौष पूर्णिमा पर 31 लाख श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई थी। सीएम ने जोर देकर कहा कि सनातन आस्था को कमजोर करने वालों को आगे बढ़ने नहीं देना चाहिए।

उन्होंने चेतावनी दी कि जाति, संप्रदाय और मत के नाम पर विभाजन बांग्लादेश जैसी स्थिति पैदा कर सकता है। विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि सेकुलरिज्म के नाम पर हिंदू धर्म को तोड़ने की कोशिशें हो रही हैं, लेकिन वे सफल नहीं हो पाएंगे।

आक्रांताओं ने सनातन धर्म को तोड़ने की कोशिश की

सीएम योगी ने कहा कि महान व्यक्तित्व धर्म के प्रति अपने मन में जागरूकता रखते हैं और उनका भाव परमार्थ के लिए होता है। इसी दृष्टि से श्रीमद् जगद्गुरु श्री रामानंदाचार्य ने सनातन धर्म की सेवा की। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि विदेशी आक्रांताओं ने समाज को तोड़ने की साजिश रची थी।

संगम तट: धर्म, ज्ञान और न्याय का केंद्र

सीएम योगी ने कहा कि प्रयागराज की पावन धरती को भगवान भारद्वाज ऋषि, वाल्मीकि ऋषि और अन्य ऋषियों ने सनातन धर्म के पावन केंद्र के रूप में विकसित किया।
यहाँ श्रद्धालु मां गंगा, यमुना और सरस्वती के सान्निध्य में अपने दैहिक और भौतिक तापों से मुक्त होकर आगे बढ़ने का संकल्प लेते हैं। यह भूमि धर्म, न्याय और ज्ञान का प्रत्यक्ष गवाह है।

संतों की कामना: योगी आदित्यनाथ प्रधानमंत्री बने

संगम तट पर स्वामी राघवाचार्य महाराज ने कहा कि गंगा तट पर संतों की यह कामना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भविष्य में प्रधानमंत्री के रूप में देखें जाएँ। उन्होंने मां गंगा और त्रिवेणी के आशीर्वाद की कामना की।

यह भी पढ़ें : मंडी मेडिकल कॉलेज में मरीज की संदिग्ध मौत, परिजन नाराज

खबरें और भी हैं...

अपना शहर चुनें