पति ने पत्नी की मांग में प्रेमी से भरवाया सिंदूर, खुद आगे बढ़कर दिया आशीर्वाद

जौनपुर: उत्तर प्रदेश के जौनपुर से सामने आया यह मामला हर किसी को हैरान भी कर रहा है और सोचने पर भी मजबूर। यहां एक पति ने न तो बदले का रास्ता चुना, न ही विवाद बढ़ाया, बल्कि अपनी पत्नी की उसके प्रेमी से शादी करवा दी और खुद आगे बढ़कर दोनों को आशीर्वाद दिया। यह दृश्य कचहरी परिसर स्थित मंदिर में देखने को मिला, जहां भावनाओं और संवेदनाओं का अनोखा संगम नजर आया।

अधिवक्ताओं, परिजनों और तीनों पक्षों की मौजूदगी में मंदिर में पूरे विधि-विधान से विवाह संपन्न कराया गया। पत्नी ने ईश्वर को साक्षी मानते हुए अपने प्रेमी को जयमाल पहनाई, प्रेमी ने उसकी मांग में सिंदूर भरा और पति इस पूरे फैसले का सबसे बड़ा गवाह बना रहा।
वायरल वीडियो में सबसे भावुक पल वह रहा, जब पति ने खुद आगे बढ़कर नवविवाहित जोड़े को आशीर्वाद दिया।

मिर्जापुर निवासी तन्जय प्रजापति की शादी साल 2022 में जौनपुर के जलालपुर क्षेत्र की पम्मी प्रजापति से हुई थी। वर्ष 2023 में दोनों के घर एक बेटे का जन्म भी हुआ। इसके बाद पति-पत्नी महाराष्ट्र में रहने लगे।
इसी दौरान पम्मी अपने प्रेमी राजू बैरागी के साथ मुंबई से गांव लौट आई। इसकी जानकारी मिलने पर तन्जय ने मुंबई के नजदीकी थाने में शिकायत दर्ज कराई और फिर खुद जौनपुर पहुंचा।

पूरा मामला समझने के बाद तन्जय ने विवाद या बदले की राह छोड़कर एक अलग फैसला लिया। उसने पत्नी और उसके प्रेमी को मंदिर ले जाकर आपसी सहमति से शादी करवाई। इसके बाद कचहरी में लिखित समझौता कराया गया और पत्नी को उसके प्रेमी के साथ विदा कर दिया गया।

मीडिया से बातचीत में तन्जय प्रजापति ने कहा कि मौजूदा समय में प्रेम संबंधों को लेकर कई दुखद घटनाएं सामने आ रही हैं।
उन्होंने बताया कि बच्चे की सुरक्षा और भविष्य को देखते हुए उसे अपने साथ रखने का फैसला किया गया है।

पत्नी पम्मी ने कैमरे के सामने कहा कि उसकी शादी झूठ बोलकर कराई गई थी और वह पति से खुश नहीं थी।
उसने बताया कि वह अपने स्कूल के साथी राजू बैरागी से लंबे समय से प्यार करती है और उसी के साथ जीवन बिताना चाहती है।

राजू बैरागी ने बताया कि वे और पम्मी स्कूल में साथ पढ़ते थे। उसकी शादी पहले हो चुकी थी, लेकिन पत्नी के निधन के बाद वह अकेला रह गया था। बाद में बातचीत के दौरान दोनों के बीच प्रेम संबंध बन गए।

मामले से जुड़े अधिवक्ताओं ने बताया कि यह पूरा निर्णय आपसी सहमति से लिया गया है और तीनों पक्षों की मौजूदगी में लिखित सहमति दर्ज कराई गई है।

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