
अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर सैन्य कार्रवाई और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई है। लेकिन अगर किसी मोर्चे पर यह टकराव बढ़ता है, तो सैन्य क्षमता के आंकड़े साफ कर देते हैं कि आमने-सामने की लड़ाई में वेनेजुएला लंबे समय तक टिक नहीं पाएगा।
वेनेजुएला की सशस्त्र सेनाओं को नेशनल बोलिवेरियन आर्म्ड फोर्सेस कहा जाता है। सक्रिय सैनिकों की संख्या लगभग 1.09 लाख है, जबकि रिजर्व फोर्स में करीब 8 हजार और मिलिशिया सहित कुल ताकत लगभग 2.2 लाख है। वायुसेना में लगभग 229 विमान हैं, जिनमें ज्यादातर पुराने रूसी मॉडल Su-30MK2 हैं। जमीनी सेना के पास 170–200 टैंक और 8,800 बख्तरबंद वाहन हैं। नौसेना सीमित क्षमता वाली है और इसमें कोई विमानवाहक पोत नहीं है। रक्षा बजट लगभग 4–5 अरब डॉलर है, जो आधुनिक हथियार और तकनीक के लिए अपर्याप्त है।
अमेरिका के पास 13 लाख सक्रिय सैनिक हैं और रिजर्व सहित कुल संख्या 21 लाख तक पहुंचती है। अमेरिकी वायुसेना में 13,000 से अधिक विमान हैं, जिनमें F-22 और F-35 जैसे स्टेल्थ फाइटर शामिल हैं। अमेरिकी नौसेना के पास 440 युद्धपोत और 11 परमाणु विमानवाहक पोत हैं। तकनीक, न्यूक्लियर हथियार, ग्लोबल नेटवर्क, सैटेलाइट और साइबर युद्ध क्षमताओं के मामले में अमेरिका हर मोर्चे पर आगे है।
अगर अमेरिका और वेनेजुएला के बीच सीधी लड़ाई होती है, तो तकनीक, हथियार और संसाधनों के लिहाज से वेनेजुएला ज्यादा समय तक टिक नहीं पाएगा। वेनेजुएला के पास गुरिल्ला रणनीति और स्थानीय मिलिशिया जैसे विकल्प बचे हैं, लेकिन ये केवल सीमित प्रभाव डाल सकते हैं।















