हाईकोर्ट का मानवीय फैसला- बचपन के गुनाह आजीविका में बाधा नहीं

जोधपुर : राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि किसी व्यक्ति ने नाबालिग रहते हुए कोई अपराध किया था, तो उसके आधार पर उसे सरकारी नौकरी से बर्खास्त नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने हनुमानगढ़ के एक दिव्यांग सफाई कर्मचारी की बर्खास्तगी को रद्द करते हुए उसे पुन: सेवा में लेने का आदेश दिया है। जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संदीप शाह की खंडपीठ ने अपीलार्थी श्रवण की विशेष अपील स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया। डिवीजन बेंच ने एकल पीठ के उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें कर्मचारी की याचिका खारिज कर दी गई थी।

दरअसल हनुमानगढ़ के जोरावरपुरा निवासी श्रवण 26 का चयन 14 जुलाई 2018 को रावतसर नगरपालिका में सफाई कर्मचारी के पद पर हुआ था। वह 70 प्रतिशत स्थायी दिव्यांगता (बौनापन) से ग्रसित है। नियुक्ति के बाद पुलिस वेरिफिकेशन में सामने आया कि श्रवण के खिलाफ 4 आपराधिक मामले दर्ज थे। इनमें से 3 मामलों में उसे जुआ अधिनियम के तहत सजा हुई थी और एक मामला आबकारी अधिनियम का था, जिसमें वह बरी हो गया था। इसी जानकारी के आधार पर नगरपालिका ने 24 अगस्त 2018 को उसकी सेवाएं समाप्त कर दी थीं। अपीलार्थी के वकील दुर्गेश खत्री ने कोर्ट में तर्क दिया कि जिन मामलों का हवाला देकर नौकरी से निकाला गया है, उस समय श्रवण नाबालिग था। उन्होंने बताया कि जुआ अधिनियम के मामले तुच्छ प्रकृति के हैं। वकील ने यह भी कहा कि पद की प्रकृति (सफाई कर्मचारी) को देखते हुए नियोक्ता को विवेकाधिकार का प्रयोग करते हुए पुरानी गलतियों को नजरअंदाज करना चाहिए था।

कोर्ट ने मामले में जुवेनाइल जस्टिस एक्ट, 2000 की धारा 19 का हवाला दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में लिखा कि जेजे एक्ट की धारा 19(1) के अनुसार, यदि किसी किशोर ने कोई अपराध किया है और इस अधिनियम के तहत कार्यवाही हुई है, तो उसे किसी भी अयोग्यता का सामना नहीं करना पड़ेगा। कोर्ट ने माना कि अपीलार्थी अपराध के समय नाबालिग था और पद की प्रकृति (स्वीपर) को देखते हुए वह सुरक्षा का हकदार है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि सफाई कर्मचारी की नियुक्ति बहाल की जाए और उसे निरंतर सेवा में माना जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कर्मचारी को सेवा में निरंतर माना जाएगा लेकिन जिस अवधि में उसने काम नहीं किया (बर्खास्तगी के दौरान), उस अवधि के लिए उसे नोशनल लाभ ही मिलेंगे। यानी, कागजों में उसकी नौकरी जारी मानी जाएगी, जिससे उसकी सीनियरिटी और पेंशन पर असर नहीं पड़ेगा, लेकिन काम नहीं करने की अवधि का नकद वेतन नहीं मिलेगा।

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