
भारत में देवी माता के अनेकों मंदिर हैं, जहां उनकी विभिन्न रूपों में पूजा की जाती है। प्रत्येक देवी मंदिर का अपना ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व है। बिहार राज्य में भी ऐसे कई प्रसिद्ध और प्राचीन देवी माता मंदिर स्थित हैं, जहां श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और विश्वास के साथ पूजा अर्चना करने के लिए दूर-दूर से आते हैं। बिहार का धार्मिक और सांस्कृतिक इतिहास प्राचीन काल से जुड़ा हुआ है और यहां स्थित शक्तिपीठ और देवी मंदिरों का महत्व बहुत अधिक है। आइए, जानते हैं बिहार के कुछ प्रमुख देवी माता मंदिरों के बारे में।
1. पटनेश्वर देवी मंदिर (पटना)
पटना, बिहार की राजधानी, एक ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल है, और यहां स्थित पटनेश्वर देवी मंदिर का विशेष महत्व है। यह मंदिर देवी के 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है, जहां देवी सती की दाहिनी जांघ गिरी थी। इस मंदिर में देवी की पूजा पटनेश्वरी देवी के रूप में की जाती है। नवरात्रि के समय इस मंदिर में विशेष पूजा अर्चना होती है और बड़ी संख्या में भक्त दर्शन करने आते हैं। इस मंदिर को रक्षिका भगवती पटनेश्वरी के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि इसे पटना शहर की रक्षा करने वाला माना जाता है। मंदिर का आस्था और शक्ति से गहरा संबंध है।
2. मनसा देवी मंदिर (भागलपुर)
बिहार के भागलपुर जिले में स्थित मनसा देवी मंदिर, देवी मनसा को समर्पित है, जो नागों की देवी और नाग देवता की बहन मानी जाती हैं। यहां बाएं हाथ से पूजा की परंपरा है। भक्तगण यहां अपनी विशेष मनोकामनाओं को लेकर आते हैं और देवी के चरणों में सर्प के प्रतीक रूप में प्रसाद चढ़ाते हैं। मान्यता है कि सती बहुला ने अपने पति के प्राणों के लिए यहां पूजा की थी। यह मंदिर न केवल धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
3. चंडी स्थान (मुंगेर)
मुंगेर जिले में स्थित चंडी स्थान, एक प्रमुख शक्तिपीठ है। मान्यता है कि यहां माता सती की बाईं आंख गिरी थी, और इसे शक्तिपीठ का दर्जा प्राप्त है। यहां मां चंडिका की पूजा होती है, और दूर-दूर से श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं पूरी करने के लिए आते हैं। यह मंदिर नेत्र रोगियों के लिए विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है। इतिहास में यह स्थान अंगराज कर्ण के द्वारा सवा मन सोना दान करने के लिए भी प्रसिद्ध है।
4. ताराचंडी मंदिर (रोहतास)
रोहतास जिले का ताराचंडी मंदिर, माता तारा को समर्पित है, जो मां दुर्गा के एक रूप के रूप में पूजित हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार यहां माता चंडी ने असुर चंड का वध किया था, जिसके कारण यह स्थान ताराचंडी के नाम से प्रसिद्ध हुआ। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस मंदिर का नाम महर्षि विश्वामित्र ने रखा था और परशुराम जी ने यहां सहस्त्रबाहु को पराजित करके मां तारा की उपासना की थी। नवरात्रि के समय इस मंदिर में विशेष भीड़ होती है।
5. जानकी मंदिर (सीतामढ़ी)
बिहार के सीतामढ़ी जिले के पास स्थित जानकी मंदिर, माता सीता के जन्म स्थान के रूप में प्रसिद्ध है। यह मंदिर धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि मान्यता है कि यहीं माता सीता राजा जनक को एक मिट्टी के पात्र में मिली थीं। एक अन्य मान्यता के अनुसार यहां पर माता सीता और भगवान श्रीराम का विवाह भी हुआ था। यह मंदिर एक प्रमुख तीर्थ स्थल है और यहां हर साल श्रद्धालु बड़ी संख्या में आते हैं।
6. मिथिला शक्तिपीठ (दरभंगा)
बिहार और नेपाल के बॉर्डर के पास स्थित मिथिला शक्तिपीठ, 51 शक्तिपीठों में से एक है। यह मंदिर देवी सती के वाम स्कंध (बाएं कंधे) गिरने के कारण प्रसिद्ध है। यहां महादेवी के रूप में देवी सती की पूजा की जाती है। यह स्थान धार्मिक दृष्टि से अत्यधिक पूज्य है, और इस शक्तिपीठ का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व बहुत अधिक है।