
Hathras : हाथरस में सिकन्दराराऊ क्षेत्र में खुरपका-मुंहपका (एफएमडी) रोग ने पशुधन के लिए गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। पशु चिकित्सा विभाग के दावों के बावजूद, गाय, भैंस और बैल सहित सैकड़ों पशु इस बीमारी की चपेट में हैं। बड़ी संख्या में पशुओं की मौत हो चुकी है, जिससे ग्रामीण चिंतित हैं।
जानकारी के अनुसार लगभग छह माह पूर्व क्षेत्र में खुरपका-मुंहपका रोग के टीके लगाए गए थे। इसके बावजूद, नवंबर माह से बीमारी का प्रसार शुरू हो गया। इस रोग में पशुओं के पैरों में सूजन आ जाती है। मुंह में छाले और घाव हो जाते हैं, जिससे उन्हें खाने-पीने में भारी परेशानी होती है। कई मामलों में मुंह से खून गिरने लगता है और कमजोरी बढ़ने से पशुओं की मौत हो जाती है। गांव सिधौली में रवि, पप्पू और वासुदेव की गायों की मौत हो चुकी है।
इसी तरह महेश की भैंस और राजपाल का बैल भी इस बीमारी से मर चुके हैं। गांव गढ़िया बरगवां में महेश की भैंस, राजपाल का बैल और वीरेंद्र उर्फ भुल्ला की दो भैंसों की मौत हुई है। गांव देवीपुर में पीतम सिंह की भैंस तथा राजकुमार और ओंकार की गायों की भी इस बीमारी से मृत्यु हो चुकी है।
गांव सराय में खूब लाल, विनोद, महिपाल, नाथू फौजी और भगवान सिंह की 12 से अधिक भैंसें इस रोग से ग्रसित हैं। महामाई सलामत की गोशाला में भी कई गायें लंगड़ा कर चल रही हैं, जो बीमारी का संकेत है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पशु चिकित्सा विभाग हरकत में आया। जिला पशुधन अधिकारी विजय सिंह अपनी टीम के साथ गांव-गांव जाकर हालात की जांच कर रहे हैं। स्थानीय पशु चिकित्सा अधिकारी केसी लोधी ने बताया कि 22 जनवरी से क्षेत्र में दोबारा टीकाकरण अभियान चलाया जाएगा।
केसी लोधी ने पशु चिकित्सकों से गलत इलाज न कराने की अपील की है।
गोसेवक अष्टभुजा ने बताया कि यह बीमारी एक माह से अधिक समय से फैली हुई है और समय रहते प्रभावी कार्रवाई न होने से पशुपालकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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