
Trump Tarrif Sparks Recession: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के टैरिफ पर फैसले में पूरी दुनिया भर के नाक में दम कर रखा है. कहते हैं ‘कांच के घर में रहने वाले दूसरों के घरों पर पत्थर नहीं फेंकते.’ ये ट्रम्प पर बिल्कुल फिट बैठ रहा है, क्येंकि उनका टैरिफ अब उन्हीं पर भारी पड़ रहा है. अमेरिकी शेयर बाजार में एक ही दिन में बाजार में 5.4 ट्रिलियन डॉलर स्वाहा हो गया और ये नुकसान कोरोना के समय के बराबर है. यही नहीं इससे कई दुनिया भर केअरबपतियों का 208 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है.
अमेरिकी बाजार में इतनी बड़ी गिरावट को लेकर अब एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर ट्रम्प यहां नहीं रुके तो अमेरिका समेत पूरी दुनिया में मंदी जैसी स्थिति बन सकती है. अमेरिका की सबसे बड़ी फाइनेंशियल फर्म जेपी मॉर्गन चेस एंड कंपनी ने भविष्यवाणी की है कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था इस साल मंदी की ओर जाएगी और इसका मुख्य कारण राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प टैरिफ को लेकर की गई घोषणा है. कंपनी ने बताया कि अमेरिका में बेरोजगारी दर 5.3% तक बढ़ जाएगी, जो मंदी के कारणों में से एक होगी.
ट्रम्प के टैरिफ और इससे आने वाली मंदी का असर-
- बेरोजगारी
- GDP में भारी गिरावट
- महंगाई में ऐतिहासिक वृद्धि
- अमेरिका से लोगों का पलायन
- निवेशकों का पीछे हटना
अमेरिकी शेयर बाजार में नुकसान में से अधिकांश अमेरिकी लोगों के निवेश और सेवानिवृत्ति पोर्टफोलियो से हैं. इसके बाद भी ट्रम्प को कोई चिंता नहीं है. उनका कहना है कि मेरी नीतियां कभी नहीं बदलेंगी. अमीर बनने का यह बेहतरीन समय है. ट्रम्प ने अपने फ़ैसले का बचाव करते हुए कहा कि इससे अमेरिका की अर्थव्यवस्था को ‘सुपरचार्ज’ मिलेगा और बड़े व्यवसाय टैरिफ़ से चिंतित नहीं हैं.
ट्रम्प के टैरिफ से भारत पर क्या पड़ेगा असर?
हालांकि, इन दिनों भारत में भी निवेशकों को नुकसान झेलना पड़ रहा है, लेकिन ये नुकसान लंबा नहीं रहेगा. दरअसल, 10% आधार टैरिफ आज से प्रभावी होगा, जबकि भारत के लिए 26% देश-विशिष्ट शुल्क अगले बुधवार यानी 9 अप्रैल से लागू होगा. इस बीच ट्रम्प ने एक खुशखबरी दी है, जो भारत के लिए तो मजे ही मजे वाला है, लेकिन चीन के लिए एक झटका है.
भारत पर पहले थोपा टैरिफ अब कर रहे मोल-भाव
CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प भारत, वियतनाम और इजरायल के साथ व्यापार समझौतों पर सक्रिय रूप से बातचीत कर रहे हैं और वह समय और प्रभाव को देखते हुए इस बोझ को कम कर सकते हैं. भारत सरकार ने कहा कि भारतीय अधिकारी ट्रम्प प्रशासन के संपर्क में हैं और उनकी बातचीत व्यापार, निवेश और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर बढ़ाने पर केंद्रित है.