Gurugram : मरीज के साथ अमानवीय व्यवहार पर मानवाधिकार आयोग ने दिखाई सख्ती

Gurugram : डायलिसिस के गंभीर मरीज के साथ अमानवीय व्यवहार के मामले में हरियाण मानवाधिकार आयोग ने सख्ती दिखाई है। पीड़ित सप्ताह में तीन बार डायलिसिस कराता है। उसे रिहायशी सोसायटी प्रबंधन द्वारा पार्किंग जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित किया गया। आयोग की ओर से गुरुग्राम के उपायुक्त को पूरे मामले की जांच करके अगली सुनवाई से पूर्व जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है।

यहां के सेक्टर-92 स्थित जीएलएस एवेन्यू सोसायटी निवासी जयप्रकाश द्वारा दी गई शिकायत में कहा गया कि उसकी दोनों किडनियां पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हैं। जिससे उसे चलने-फिरने में कठिनाई होती है। कई बार वह बेहोश भी हो चुका है। मानवाधिकार आयोग के सदस्य (न्यायिक) कुलदीप जैन के समक्ष शिकायत में पीड़ित ने कहा कि वह अपनी पत्नी के साथ इस सोसायटी में रहता है। उसकी पत्नी एक निजी स्कूल में अध्यापिका हैं व वह परिवार की एकमात्र कमाने वाली सदस्या है। परिवार में उनकी दो नाबालिग बेटियां हैं, जिनकी उम्र करीब 11 वर्ष व तीन वर्ष है। सोसायटी के स्टाफ ने उसकी गंभीर चिकित्सीय स्थिति की अनदेखी करते हुए उसे सोसायटी परिसर के भीतर वाहन पार्क करने की अनुमति नहीं दी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि पार्किंग की सुविधा केवल उन्हीं निवासियों को विशेष तौर पर दी जाती है, जो स्टाफ के परिचित हैं या फिर अवैध धनराशि का भुगतान करते हैं। पीड़ित और उसके परिवार को मानसिक उत्पीडऩ एवं भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है।

आयोग के सदस्य (न्यायिक) कुलदीप जैन ने अपने आदेश में लिखा कि शिकायत के अवलोकन से प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि शिकायतकर्ता एक गंभीर एवं जीवन-घातक चिकित्सीय स्थिति से ग्रस्त है। वह नियमित डायलिसिस पर निर्भर है। उसको बिल्डर/सोसायटी स्टाफ द्वारा मानसिक उत्पीडऩ, भेदभाव एवं अमानवीय व्यवहार का सामना करना पड़ा है। शिकायतकर्ता की गंभीर रूप से बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति की पूर्ण जानकारी होने के बावजूद उसको पार्किंग जैसी एक बुनियादी एवं उचित सुविधा से जान-बूझकर वंचित किया जाना उसको अनावश्यक शारीरिक कष्ट, मानसिक पीड़ा एवं अपमान का कारण बना है। कुलदीप जैन ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि ऐसा आचरण भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत प्रदत्त गरिमा सहित जीवन के अधिकार का उल्लंघन है।

शिकायत के अनुसार यह कथित कृत्य शिकायतकर्ता के प्रति न केवल असंवेदनशीलता को दर्शाते हैं, बल्कि उसकी पत्नी एवं नाबालिग बच्चों के लिए भी एक असुरक्षित, शत्रुतापूर्ण एवं अपमानजनक आवासीय वातावरण भी उत्पन्न करते हैं। आयोग के सदस्य कुलदीप जैन की ओर से गुरुग्राम के उपायुक्त को इस मामले में नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। निर्देश दिए गए हैं कि वे किसी वरिष्ठ एवं उत्तरदायी राजपत्रित अधिकारी के माध्यम से इस मामले की जांच कराएं। शिकायतकर्ता की गंभीर चिकित्सीय स्थिति को ध्यान में रखते हुए उसे तत्काल आवश्यक राहत सुनिश्चित की जाए। साथ ही पुलिस आयुक्त गुरुग्राम को निर्देशित किया गया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि शिकायतकर्ता को भविष्य में किसी भी प्रकार के उत्पीडऩ, दबाव या धमकी का सामना न करना पड़े।

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