
कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई टोक्यो में चल रहे कार्यक्रम में कर रहे हैं भारतीय शैक्षणिक प्रतिनिधिमंडल का प्रतिनिधित्व
हिसार। गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय हिसार (गुजविप्रौवि) ने अपनी अंतर्राष्ट्रीय पहचान को और अधिक मजबूत किया है। गुजविप्रौवि को भारत-जापान उच्च शिक्षा मिशन के ‘रणनीतिक लीड पार्टनर’ के रूप में चुना गया है। विश्वविद्यालय को यह लीड पार्टनरशिप ‘पर्यावरण विज्ञान’ और ‘प्रिंटिंग एवं पैकेजिंग टेक्नोलॉजी’ के क्षेत्र में मिली है। यह मिशन न केवल शिक्षा के ढांचे को बदलेगा, बल्कि हरियाणा के विद्यार्थियों के लिए जापान के शीर्ष विश्वविद्यालयों और मल्टीनेशनल कंपनियों (एमएनसीज) के बीच सहयोग के द्वारा भी खोलेगा। गुजविप्रौवि के कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई टोक्यो में चल रहे भारत-जापान उच्च शिक्षा मिशन (आईजेएचईएम) कार्यक्रम में भारतीय शैक्षणिक प्रतिनिधिमंडल का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इस कार्यक्रम में भारत की तरफ से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तथा केंद्रीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर मुख्य रूप से भाग ले रहे हैं।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने यहां कहा है कि हिसार जैसे केंद्रों को वैश्विक मिशन में शामिल करना दर्शाता है कि भारत की प्रतिभा अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं है। गुजविप्रौवि इस साझेदारी का चमकता सितारा बनेगा।
कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने कहा है कि विश्वविद्यालय को ‘पर्यावरण विज्ञान’ और जापान की विश्व-प्रसिद्ध ‘प्रिंटिंग एवं पैकेजिंग टेक्नोलॉजी’ में अनुसंधान के लिए ‘लीड पार्टनर’ घोषित किया गया है। यह हमारे हिसार के विद्यार्थियों के लिए वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बनाने का सबसे बड़ा अवसर है। गुजविप्रौवि को अब एक बड़ी जिम्मेदारी मिली है। गुजविप्रौवि हिसार अब केवल एक क्षेत्रीय विश्वविद्यालय नहीं, बल्कि भारत-जापान सांझेदारी का एक वैश्विक स्तंभ होगा। इसके तहत विश्वविद्यालय परिसर में बहुत जल्द एक ‘इंडो-जापान ग्रीन टेक लैब’ और अत्याधुनिक ‘स्मार्ट पैकेजिंग सेंटर’ की आधारशिला रखी जाएगी।
कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने बताया कि ‘दो साल हिसार, दो साल जापान’ एक ऐतिहासिक समझौते के तहत अब गुजविप्रौवि सहित 25 चयनित संस्थानों के छात्र ‘एकीकृत दोहरी डिग्री’ ले सकेंगे। इसमें विद्यार्थी अपनी आधी पढ़ाई भारत में और आधी जापान के प्रमुख विश्वविद्यालयों में पूरी करेंगे। यह डिग्री दोनों देशों की सरकारों और कॉपोर्रेट सेक्टर द्वारा पूरी तरह मान्य होगी। इस संबंध में ‘सकुरा-लोटस’ स्कॉलरशिप के अंतर्गत मेधावी विद्यार्थियों के लिए $500 मिलियन का फंड जारी किया गया है। गुजविप्रौवि के वे विद्यार्थी जो सतत ऊर्जा और एग्री-टेक में शोध करेंगे, उन्हें ₹50,000 प्रति माह का वजीफा और जापान में छह माह की पेड-इंटर्नशिप दी जाएगी।
कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने बताया कि ‘जापान डेस्क’ की स्थापना के अंतर्गत हिसार और गुरुग्राम के बीच एक ‘स्किल कॉरिडोर’ विकसित किया जा रहा है।
मारुति, तोशिबा और होंडा जैसी जापानी कंपनियां अब गुजविप्रौवि के कैंपस में ही अपना ‘रिक्रूटमेंट डेस्क’ खोलेंगी, जिससे विद्यार्थियों को पढ़ाई पूरी होते ही सीधे जापानी तकनीकी क्षेत्रों में नौकरियां मिल सकेंगी। हिसार और हरियाणा के ग्रामीण परिवेश से आने वाले विद्यार्थियों के लिए अब ‘जापान में करियर’ एक सपना नहीं बल्कि एक वास्तविकता होगी। जापानी तकनीक (जैसे केजन और लीन) और भारतीय नवाचार का यह संगम हरियाणा को भारत के ‘एजुकेशन हब’ के रूप में स्थापित करेगा। फरवरी 2026 में ऑनलाइन पंजीकरण पोर्टल (आईजेएचईएम-पोर्टल) लाइव होगा तथा अगस्त 2026 में पहले बैच की कक्षाएं और जापानी भाषा प्रशिक्षण शुरू होगा।















