
दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश के रूप में अमेरिका ने युद्ध, प्रतिबंध, गुप्त ऑपरेशन और सत्ता परिवर्तन के माध्यम से वैश्विक राजनीति पर गहरा प्रभाव डाला है। जिन नेताओं ने अमेरिकी हितों को चुनौती दी या जिन्हें खतरा माना गया, उन्हें अक्सर गंभीर परिणाम भुगतने पड़े। हाल ही में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिका ने हिरासत में लिया। आइए जानते हैं ऐसे और उदाहरण।
अमेरिकी सरकार लंबे समय से वेनेजुएला में मादुरो के शासन को सत्तावादी मानती रही है। उन पर मानवाधिकारों के उल्लंघन और नार्को आतंकवाद के आरोप लगाए गए। हाल ही में ऑपरेशन एब्सलूट रिजॉल्व के तहत अमेरिकी नेतृत्व वाली सैन्य कार्रवाई में वेनेजुएला में हवाई हमले किए गए। इसके बाद मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में लेकर न्यूयॉर्क भेजा गया, जहां उन पर मुकदमा चलेगा।
1990 में कुवैत पर आक्रमण ने इराक को अमेरिका के साथ टकराव की राह पर ला दिया। 2003 में अमेरिकी नेतृत्व वाले गठबंधन ने इराक पर हमला किया। सद्दाम को पकड़कर मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए मुकदमा चलाया गया और 30 दिसंबर 2006 को उन्हें फांसी दी गई।
पनामा के पूर्व राष्ट्रपति मैनुअल नोरिएगा कभी अमेरिका का सहयोगी और सीआईए एजेंट था। ड्रग तस्करी और खुफिया जानकारी लीक करने के आरोपों के बाद उसकी स्थिति खराब हो गई। 1989 में ऑपरेशन जस्ट कॉज के तहत अमेरिका ने पनामा पर हमला किया और नोरिएगा को सत्ता से हटाकर अमेरिका को सौंपा गया। अमेरिकी जेल में कई साल रहने के बाद 2017 में उनकी मृत्यु हो गई।
होंडुरास के पूर्व राष्ट्रपति जुआन पर अमेरिकी अभियोजकों ने बड़े पैमाने पर ड्रग तस्करी के आरोप लगाए। उन्हें 2022 में अमेरिका को सौंपा गया, लेकिन दिसंबर 2025 में उन्हें पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा विवादास्पद माफी मिली। इसके बावजूद होंडुरास के अधिकारियों ने तुरंत अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट जारी किया।
इन उदाहरणों से साफ है कि अमेरिका से टकराने वाले नेताओं को अक्सर राजनीतिक, कानूनी या सैन्य तरीकों से गंभीर परिणाम भुगतने पड़े हैं। निकोलस मादुरो की हिरासत भी इसी लंबी परंपरा का हिस्सा मानी जा रही है।
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