इंदौर में 20 मौतों के बाद देशभर में दूषित पानी की बढ़ी चिंता…पेयजल गुणवत्ता पर सवाल, पुरानी और जर्जर पाइपलाइन बनी जानलेवा

इंदौर : इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से 20 लोगों की मौत के बाद देशभर में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ गई है। दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच भारत के कई शहरों से गंदे, बदबूदार और सीवेज मिश्रित पानी की शिकायतें सामने आई हैं।

इंदौर मामले में पानी में फीकल बैक्टीरिया पाए गए, जिससे साफ हुआ कि जर्जर जल आपूर्ति और लापरवाही लोगों की जान पर भारी पड़ रही है। घटना के बाद अन्य राज्यों में भी पानी की जांच तेज कर दी गई, जिनमें कई जगह हालात चिंताजनक पाए गए।

गांधीनगर: गुजरात की राजधानी में टाइफाइड के मामले बढ़े हैं। बीते कुछ दिनों में 100 से अधिक मरीज सामने आए हैं, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं। नई पाइपलाइन में खामियों के कारण पानी दूषित हुआ।

रोहतास, बिहार: जिले के 332 गांवों में अत्यधिक फ्लोराइड युक्त पानी के कारण कई लोग दिव्यांग हो गए हैं। लोक स्वास्थ्य विभाग ने इन गांवों को फ्लोराइड प्रभावित घोषित किया, लेकिन वर्षों बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो सका।

ग्रेटर नोएडा, यूपी: डेल्टा-1 सेक्टर के सी-ब्लॉक में सप्लाई के पानी में सीवर मिश्रण के कारण पिछले तीन दिनों में 15 से ज्यादा लोग बीमार पड़े। बच्चों और बुजुर्गों को उल्टी, दस्त और पेट दर्द की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। लोग मजबूरन निजी कैन या उबला हुआ RO पानी पी रहे हैं।

इसके अलावा दिल्ली, उत्तराखंड (काशीपुर), हरियाणा (सोनीपत), मध्य प्रदेश (भोपाल, उज्जैन, जबलपुर), उत्तर प्रदेश (लखनऊ), ओडिशा (खुर्दा) और कई अन्य शहरों से गंदे पानी की शिकायतें आई हैं। पुराने पाइपलाइन नेटवर्क और सीवेज मिश्रण की समस्या लगातार स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर रही है।

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