
शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सहायक अभियंता (विद्युत) भर्ती प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवार ने चयन प्रक्रिया के किसी भी स्तर पर छूट (रिलैक्स स्टैंडर्ड) का लाभ लिया है, तो उसे बाद में सामान्य श्रेणी की सीटों पर समायोजित नहीं किया जा सकता।
न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत ने कहा कि यह अब स्थापित कानून है कि आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवार जो उम्र, अनुभव या कट-ऑफ में किसी भी प्रकार की छूट का लाभ लेते हैं, वे सामान्य श्रेणी की रिक्तियों के लिए पात्र नहीं रहते। रिकॉर्ड के अनुसार, याचिकाकर्ता ने स्क्रीनिंग टेस्ट के दौरान ईडब्ल्यूएस श्रेणी के लिए निर्धारित कम अंकों की छूट का लाभ उठाया था। इसलिए उन्हें सामान्य श्रेणी में माइग्रेट नहीं किया जा सकता।
यह मामला हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा 2022 में विज्ञापित सहायक अभियंता (इलेक्ट्रिकल) के 76 पदों से संबंधित है। याचिकाकर्ता आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) से थी और तर्क दिया कि यदि उन्हें सामान्य श्रेणी में समायोजित किया जाता, तो ईडब्ल्यूएस की एक सीट खाली हो जाती और उनका चयन सुनिश्चित हो जाता।
साथ ही, हाईकोर्ट में सरकारी कर्मचारी भर्ती और सेवा शर्तों से संबंधित विधेयक-2024 को चुनौती देने वाली याचिका पर बहस पूरी हो गई है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रोमेश वर्मा की खंडपीठ ने सभी पक्षों की सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। याचिकाकर्ताओं ने सरकार की दलीलों का खंडन करते हुए विधेयक को संविधान के प्रावधानों के खिलाफ बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की।
सरकार ने विधेयक का पक्ष रखते हुए बताया कि इसका उद्देश्य नियमित और अनुबंध कर्मचारियों को अलग करना है और अब जो भी नियुक्ति पत्र जारी हो रहे हैं, वे नए अधिनियम के अनुसार हैं। पहले ताज मोहम्मद मामले में अनुबंध कर्मचारियों को नियुक्ति की तारीख से वित्तीय लाभ देने का फैसला पारित हुआ था, जिससे उन्हें लाभ मिल रहा है, जिनकी नियुक्ति आरएंडपी नियमों के तहत नहीं हुई थी।
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