Etah : CM योगी की प्राथमिकता पर अफसरशाही भारी, 9 माह से अटकी फाइलों ने 34 छात्रों का भविष्य डाला संकट में

Marhara, Etah : एक ओर प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रदेश में व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास को प्राथमिकता देते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दे रहे हैं कि हर छात्र को योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ मिले, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।

कस्बा मारहरा स्थित सहायता प्राप्त रानी अवंती बाई इंटर कॉलेज का मामला न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कैसे अधिकारियों की उदासीनता 34 छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ कर रही है।

9 माह से अटकी फाइल, छात्र बेहाल

कॉलेज में सरकार की मंशा के अनुरूप बुनाई तकनीकी एवं ऑटोमोबाइल ट्रेड की मान्यता दी गई थी। इन ट्रेडों के संचालन के लिए सेवानिवृत्त शिक्षक राधेश्याम का कार्यकाल 31 मार्च 2025 को समाप्त हुआ। नियमानुसार 1 अप्रैल 2025 से उनका दो वर्षों का नवीनीकरण होना था।

लेकिन हैरानी की बात यह है कि नवीनीकरण से संबंधित पत्रावली पिछले 9 माह से कार्यालयों में धूल फांक रही है, जबकि आज तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।

फरवरी में परीक्षा, पढ़ाने वाला कोई नहीं

वर्तमान में व्यावसायिक शिक्षा के तहत कक्षा 11 में 14 छात्र तथा इंटरमीडिएट में 20 छात्र पंजीकृत हैं। छात्रों का कहना है कि 9 माह से शिक्षक न होने के कारण पढ़ाई पूरी तरह ठप है, जबकि इंटरमीडिएट की परीक्षा 18 फरवरी से प्रस्तावित है। ऐसे में छात्र परीक्षा की तैयारी कैसे करें, यह सबसे बड़ा सवाल बन गया है।

अभिभावकों की गुहार, प्रशासन मौन

छात्रों और अभिभावकों ने इस गंभीर स्थिति को लेकर जिलाधिकारी एटा और मुख्यमंत्री कार्यालय तक गुहार लगाई है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

जिम्मेदारों के बयान

कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. आर. एस. सागर का कहना है कि शिक्षक के नवीनीकरण की पत्रावली डीआईओएस कार्यालय भेजी जा चुकी है और अनुमोदन मिलते ही शिक्षक को कार्यभार ग्रहण करा दिया जाएगा।

वहीं डीआईओएस इंद्रजीत ने साफ कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है। प्रधानाचार्य और कार्यालय के पटल प्रभारी से जानकारी प्राप्त करने के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा।

बड़ा सवाल

जब मुख्यमंत्री स्वयं व्यावसायिक शिक्षा को भविष्य की नींव बता रहे हैं, तो फिर कागजों में उलझी फाइलें और जिम्मेदार अफसरों की चुप्पी आखिर किसके हित में है?
यदि समय रहते निर्णय नहीं हुआ, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी उस प्रशासनिक तंत्र की होगी, जिसने छात्रों के भविष्य को दांव पर लगा दिया।

खबरें और भी हैं...

अपना शहर चुनें