Etah : पटना पक्षी विहार में पहली बार एशियन वाटरबर्ड सेंसस-26 की गणना, रिकॉर्ड 56 प्रजातियों के 4705 जलीय पक्षी पाए गए

Etah : एटा में जलेसर के क्षेत्रीय पटना पक्षी विहार में बुधवार को एशियन वाटरबर्ड सेंसस-26 की पहली गणना का आयोजन किया गया, जिसमें रिकॉर्ड 56 प्रजातियों के कुल 4705 जलीय पक्षी देखे गए। इस दौरान, जलीय पक्षियों की 27 प्रवासी प्रजातियां और 29 आवासीय प्रजातियों की पुष्टि हुई। इसके साथ ही, 09 संकटग्रस्त प्रजातियां भी इस गणना में प्रकाश में आई हैं।

प्रदेश के सबसे छोटे अभ्यारण्य पटना पक्षी विहार में बुधवार को पहली बार इस तरह की जलीय पक्षी गणना हुई, जो वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम है। एशियन वाटरबर्ड सेंसस-26 के अंतर्गत हुई इस गणना में सबसे अधिक नोर्डन पिनटेल की संख्या 1270 पक्षी दर्ज की गई। इसके बाद क्रमशः काॅमन टील (458), नोर्डन शोवलर (432), गेडवाल (369), और काॅमन कूट (295) पक्षियों की संख्या गणना में सामने आई।

गणना में 09 संकटग्रस्त प्रजातियों की भी पहचान हुई, जिनमें सारस क्रेन, ओपन बिल स्टॉर्क, पेन्टेड स्टार्क, ब्लैक हेडेड आईबिश, काॅमन पोचार्ड, ब्लैक-नेक्ड स्टॉर्क, ओरिएंटल डार्टर, फेरुगिनस डक, और ग्रेटर स्पॉटेड ईगल शामिल हैं।

यह गणना वेटलैंड्स इंटरनेशनल के सहयोग से, बायोडायवर्सिटी रिसर्च एंड डवलपमेंट सोसाइटी (BRDS) व नेशनल चंबल सेंचुरी प्रोजेक्ट के संयुक्त प्रयास से पूरी की गई।

वेटलैंड्स इंटरनेशनल उत्तर प्रदेश के कोऑर्डिनेटर नीरज श्रीवास्तव के निर्देशन में, बीआरडीएस के पक्षी विशेषज्ञ डाॅ. के. पी. सिंह के नेतृत्व में इस गणना कार्य में अनुज यादव, अब्दुल कलाम, वन दरोगा शीलेन्द्र पाल सिंह, वन रक्षक श्वेता पाल, और मुमताज कुमार ने भी भाग लिया।

डाॅ. के. पी. सिंह ने बताया कि भारतीय क्षेत्र में प्रवासी पक्षियों का माइग्रेशन सेंट्रल एशियन फ्लाईवे के माध्यम से होता है। पटना पक्षी विहार इस फ्लाईवे के स्टॉपओवर वेटलैंड्स में शामिल है, जहां प्रवासी पक्षियों की प्रजातियों और संख्या में सर्वाधिक विविधता देखी गई। यह वेटलैंड का संरक्षण प्रयास और बेहतर प्रबंधन का परिणाम है, जो प्रजातियों की विविधता और जलीय पक्षियों की संख्या को बढ़ावा दे रहा है।

पक्षी विशेषज्ञों का मानना है कि प्रवासी पक्षियों के लिए यह क्षेत्र अत्यंत महत्वपूर्ण है, और यहाँ का मेनेजमेंट एवं संरक्षण प्रभावी ढंग से किया जा रहा है।

चांदनी सिंह, डीएफओ, राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण परियोजना, ने कहा कि जल स्तर व्यवस्था और प्रवासी पक्षियों के सुरक्षित हैविटेट के मेनेजमेंट के तहत, पटना पक्षी विहार में निगरानी और सतर्कता को और भी मजबूत किया गया है, ताकि पक्षियों का प्राकृतिक आवास सुरक्षित रहे और प्रवास के दौरान कोई बाधा न आए।

यह पहली बार हुई इस तरह की विस्तृत गणना ने वेटलैंड्स की जैव विविधता और पक्षी संसाधनों की स्थिति को उजागर किया है, जो संरक्षण के प्रयासों को नई दिशा दे रहा है।

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