UP SIR की सुनवाई के समय CJI सूर्यकांत ने कह दी ऐसी बात चुप हो गए याचिकाकर्ताओं के वकील शमशाद

UP SIR Hearing in SC CJI Court : विभिन्न राज्यों में एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया को चुनौती देने वाले मामलों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। इस महत्वपूर्ण सुनवाई की अध्यक्षता कर रहे चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सत्यापन का निर्णय किसी के निर्वासन के समान नहीं है। वहीं, याचिकाकर्ताओं ने इस प्रक्रिया को लेकर ग्रामीण और गरीब वर्ग के मतदाताओं पर पड़ने वाले प्रभाव का मुद्दा उठाया है।

सुनवाई के दौरान, उत्तर प्रदेश से जुड़े एसआईआर मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शमशाद ने कहा कि लगभग 100 याचिकाकर्ता हैं, जो सभी ग्रामीण इलाकों के निवासी हैं। उन्होंने कहा कि इन याचिकाकर्ताओं की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे अदालत की फीस लगभग 50 हजार रुपये नहीं दे सकते। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने संक्षिप्त टिप्पणी करते हुए कहा कि इस मामले में किसी विशेष दिशा-निर्देश की जरूरत नहीं है।

वहीं, केंद्रीय चुनाव आयोग (ECI) के वकील राकेश द्विवेदी ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम (आरपी एक्ट) की धारा 146(C) में चुनाव से जुड़े मामलों में सुनवाई और निर्णय का पूरा प्रावधान पहले से परिभाषित है। उन्होंने बताया कि चुनाव आयोग का जिम्मा है कि वह यह सत्यापित करे कि मतदाता नागरिक है या नहीं, लेकिन इस प्रक्रिया का अर्थ यह नहीं है कि किसी व्यक्ति का स्वतः निर्वासन किया जाएगा।

राकेश द्विवेदी ने आगे कहा कि यदि किसी मतदाता की नागरिकता पर सवाल उठता है, तो उस व्यक्ति को केंद्र सरकार के समक्ष जांच के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। उनका तर्क था कि चुनाव आयोग का निर्णय केवल मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने का है और इसका अर्थ नागरिकता छीनने या देश से बाहर करने का नहीं है। इस तरह, चुनाव आयोग ने साफ किया कि एसआईआर प्रक्रिया नागरिकता छीनने या निर्वासन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह मतदाता सत्यापन का एक प्रावधान है।

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