डॉ. मंदाकिनी राय : सावित्रीबाई और फातिमा शेख ने महिला शिक्षा को ज्ञान की कुंजी माना था…इसी से समानता आएगी

  • ‘हमारा खून खौलता क्यों नहीं.. यह खून पानी तो नहीं हो गया’ : विमल किशोर

Lucknow : एपवा, जसम और आइसा की ओर से आज एसबीएम लाइब्रेरी के सभागार में ‘यादें सावित्रीबाई फुले व फातिमा शेख’ पर संवाद का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में शिक्षा के महत्व और महिलाओं की जिंदगी में आए बदलाव पर सावित्रीबाई फुले और फातिमा शेख के योगदान को याद किया गया।

प्रमुख वक्ता इतिहास की प्रवक्ता डॉ. मंदाकिनी राय ने कहा कि सावित्रीबाई और फातिमा शेख ने महिला शिक्षा को ज्ञान की कुंजी माना था। वह जानती थी कि इसी से समाज बदलेगा और समानता आएगी। उनका आंदोलन शिक्षा, सामाजिक सुधार के लिए तथा समाज की प्रभुत्वशाली संस्कृति के विरुद्ध था। उन्हें काफी विरोध का सामना करना पड़ा । फिर भी वे अपने लक्ष्य पर अडिग रहीं। वह संघर्ष आज भी जारी है।

डॉ. मंदाकिनी राय का यह भी कहना था कि शिक्षा की हालत आज ऐसी है कि लड़कियों को शिक्षा से बाहर करने के तमाम उपक्रम किया जा रहे हैं। देश लोकतांत्रिक है लेकिन हमारे परिवार और समाज में कितनी लोकतंत्रिकता है, इस पर प्रश्न चिन्ह है। ऐसे में हमारी पहली जरूरत है कि न सिर्फ स्कूली शिक्षा बल्कि लोकतंत्र की शिक्षा से भी हमारे परिवार और समाज को शिक्षित-दीक्षित किया जाए।
एपवा की जिला संयोजक सरोजिनी बिष्ट ने बढ़ती हुई हिंसा व बलात्कार पर अपनी चिंता जताते हुए कहा कि बलात्कारियों को सत्ता का संरक्षण मिल रहा है। राम-रहीम, आसाराम, कुलदीप सेंगर को पैरोल, बेल मिलता है, वहीं सामाजिक आंदोलन के कार्यकर्ताओं को जेल भेजा जा रहा है। मनुवादी विचारों की तो हवा बह रही है। ऐसे में महिलाओं का संगठित होना जरूरी है।

जन आंदोलन को तेज करके ही सावित्रीबाई फुले और फातिमा शेख की क्रांतिकारी विरासत को आगे बढ़ाया जा सकता है।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में विमल किशोर, हेना रिज़वी, रेनू शुक्ला, साजिदा सबा, प्रिया वर्मा, श्रद्धा बाजपेई, रोहिणी जॉन, शांतम निधि और संविधा आदि ने अपनी कविताओं व शायरी के रंग से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। विमल किशोर अपनी ‘युद्ध के विरुद्ध’ कविता में कहती हैं ‘यह युद्ध का मंजर/ गहराई तक भेज रहा मर्म को /हर तरफ चीत्कार और तबाही/बेवा होती स्त्रियां /बेटे के इंतजार में बूढ़ी होती मां/अपना सहारा ढूंढत’और आगे सवाल करती हैं ‘मानवता लहूलूहान है/ जिंदगी का चीरहरण हो रहा है/ और हम मूक दर्शक बने देख रहे हैं /हमारा खून खौलता क्यों नहीं/ यह खून पानी तो नहीं हो गया’।

जन संस्कृति मंच की ओर से सईदा सायरा ने सभी का स्वागत किया। एपवा की कमला गौतम ने बताया कि 3 जनवरी से 9 जनवरी तक पूरे सप्ताह सावित्रीबाई-फातिमा शेख की स्मृति में एपवा की ओर से जन अभियान चलाया जा रहा है ।

इसकी शुरुआत 3 जनवरी को शहीद स्मारक पर संयुक्त प्रदर्शन से हुआ। आगे लखनऊ के विभिन्न क्षेत्रों जैसे हरदासीखेड़ा, मोहेबुल्लापुर, गोराही आदि जगहों पर आयोजनों के द्वारा महिला विरोधी, जातिवादी-सांप्रदायिक राजनीति के खिलाफ जन प्रतिरोध को तेज किया जाएगा।
कार्यक्रम का समापन गीत गायन से हुआ। इस अवसर पर सईदा सायरा, कौशल किशोर, फरजाना महदी, सुचित माथुर आदि मौजूद रहे।

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