
Iran Protest : ईरान में पिछले साल के अंत में शुरू हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला जारी है, जिसमें अब तक 60 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि अमेरिका ईरान को सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की सरकार से आजादी दिलाने में मदद करने को तैयार है।
ट्रंप ने ट्रूथ सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा कि “ईरान आजादी की ओर देख रहा है, शायद ऐसा पहले कभी नहीं हुआ।” उन्होंने आगे कहा कि “अमेरिका मदद के लिए तैयार है।” ट्रंप ने इससे पहले भी चेतावनी दी थी कि यदि ईरान सरकार प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाती है तो उसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। उनके ताजा बयान के बाद, ईरान में अमेरिका की संभावित कार्रवाई को लेकर आशंकाएं बढ़ गई हैं।
बता दें कि ईरान में इन प्रदर्शनों की शुरुआत तब हुई थी जब इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिका के फ्लोरिडा में डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात कर ईरान पर हमला करने का प्लान पेश किया था। यह घटना उस समय हुई थी जब ट्रंप और नेतन्याहू के बीच इस मुद्दे पर चर्चा हो रही थी।
यह महत्वपूर्ण है कि ईरान में विरोध प्रदर्शन पिछले साल के अंत में शुरू हुए थे, और उस वक्त की घटना का संबंध उस समय की गई अमेरिकी और इजरायली नेताओं की बातचीत से भी जुड़ा हुआ है। विशेष रूप से, जब बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान पर हमला करने का प्लान दिखाया था। इससे पहले, अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ट्रंप प्रशासन ईरान पर संभावित हमला करने की योजना बना रहा है।
न्यूयॉर्क पोस्ट ने वॉल स्ट्रीट जर्नल के हवाले से बताया है कि अमेरिका के अधिकारी इस समय इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ बड़े पैमाने पर हवाई हमले करने का विकल्प पर विचार कर रहे हैं। इन विकल्पों में कई ईरानी मिलिट्री ठिकानों को निशाना बनाकर बड़े पैमाने पर हमला करने की योजना भी शामिल है। हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है और न ही किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई के लिए अमेरिकी जवान या हथियार तैनात किए गए हैं।
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सुप्रीम लीडर और सरकार को चेतावनी दी थी कि यदि वे प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाते हैं तो अमेरिका जवाब देगा। वहीं, ईरान में पुलिस की कार्रवाई में अब तक 60 से अधिक प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है, जिसके कारण अमेरिका में ईरान के खिलाफ सैन्य कदम उठाने पर चर्चा तेज हो गई है। याद रहे कि पिछले साल जून में, अमेरिका ने ईरान के परमाणु स्थलों पर हमला किया था।
शुरुआत में ईरान ने कहा था कि उनके परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमले बेअसर रहे हैं, लेकिन धीरे-धीरे यह स्वीकार किया गया है कि अमेरिकी बंकर बस्टर हमलों के तहत उनके अंडरग्राउंड परमाणु स्थल बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए हैं। अब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता जा रहा है, और संभावित सैन्य कार्रवाई की आशंका भी बनी हुई है।
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