
Iran Crisis : भारत सरकार ने तेरान में बढ़ते सत्ता विरोधी प्रदर्शनों और पश्चिम एशिया में बदलते भू-राजनीतिक हालात के बीच, अपने नागरिकों के लिए एक महत्वपूर्ण ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से कहा है कि भारतीय नागरिकों को अगले आदेश तक इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की गैर-जरूरी यात्रा से बचना चाहिए। यह कदम ईरान के बिगड़ते आंतरिक सुरक्षा, निरंतर हो रहे विरोध प्रदर्शनों और अंतर्राष्ट्रीय तनाव के मद्देनजर उठाया गया है।
विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में सलाह दी है कि सभी भारतीय नागरिक और भारतीय मूल के लोग अत्यधिक सतर्कता बरतें। खासतौर पर, विरोध प्रदर्शन, रैली, धरना या भीड़भाड़ वाले इलाकों से दूर रहने की सलाह दी गई है। स्थानीय समाचारों पर नजर रखने और तहरान में स्थिति की जानकारी के लिए भारतीय दूतावास के संपर्क में रहने का भी निर्देश दिया गया है।
दरअसल, ईरान में शुरू हुए विरोध प्रदर्शन शुरू में महंगाई, बेरोजगारी, ईंधन की बढ़ती कीमतों और आर्थिक संकट पर केंद्रित थे, लेकिन अब ये आंदोलन व्यापक रूप से मानवीय अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक जवाबदेही जैसे मुद्दों को भी समेट चुके हैं। कई जगहों पर सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की खबरें आ रही हैं, जिससे स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई है।
अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भी तनाव बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरानी सरकार प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक सख्ती करती है तो अमेरिका हस्तक्षेप कर सकता है। इस बयान के जवाब में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनई ने कड़ा विरोध जताया और कहा कि यदि अमेरिका ने कोई भी हस्तक्षेप का प्रयास किया तो उसके गंभीर परिणाम होंगे। वहीं, इजराइल ने भी ईरान में हो रहे विरोध प्रदर्शनों का समर्थन किया है, जिसे ईरान ने आंतरिक मामलों में दखल माना है। इन घटनाक्रमों ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है।
ईरान की सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह किसी भी तरह की अशांति या सत्ता विरोधी गतिविधियों को सख्ती से निपटाएगी। सरकारी प्रवक्ता ने कहा है कि देश की संप्रभुता और स्थिरता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा, और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
इन सभी घटनाओं के बीच, भारत सरकार का प्राथमिक उद्देश्य अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। ईरान में बड़ी संख्या में भारतीय छात्र, व्यवसायी, पेशेवर और श्रमिक रहते हैं, साथ ही धार्मिक और सांस्कृतिक कारणों से भी भारतीय नागरिक नियमित तौर पर यात्रा करते हैं। ऐसे में, अस्थिरता के माहौल में किसी भी अप्रिय घटना से बचाव के लिए ट्रैवल एडवाइजरी को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विदेश मंत्रालय ने पहले भी संघर्षग्रस्त क्षेत्रों के लिए सावधानीपूर्वक अलर्ट जारी किया है, ताकि भारतीय मिशन अपने नागरिकों तक समय रहते पहुंच सके। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में वर्तमान हालात तेजी से बदल रहे हैं और किसी भी देश के लिए भविष्यवाणी करना कठिन हो गया है। इसलिए, यह सलाह पूरी तरह से सावधानी बरतने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की है। नागरिकों को चाहिए कि वे किसी भी स्थिति में तुरंत भारतीय दूतावास से संपर्क करें।
अंत में, तेहरान में जारी सत्ता विरोधी प्रदर्शनों, अंतरराष्ट्रीय बयानबाजी और संभावित टकराव के माहौल ने ईरान की स्थिति को बेहद नाजुक बना दिया है। भारत सरकार का यह परामर्श केवल एक चेतावनी ही नहीं, बल्कि अपने नागरिकों की सुरक्षा और जिम्मेदारी का भी संकेत है। ईरान अभी अपने सबसे गंभीर राजनीतिक और सामाजिक संकट का सामना कर रहा है।
हाल ही में, कई मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनई विद्रोह के बेकाबू होने की स्थिति में देश छोड़ने की योजना बना रहे हैं। कहा जा रहा है कि यदि सेना या सुरक्षा बल प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने से इनकार कर दें या सरकार का सहयोग छोड़ दें, तो खामेनई अपने देश से बाहर जाने की तैयारी कर सकते हैं। हालांकि, ईरानी दूतावास ने इन खबरों को खारिज करते हुए इसे विदेशी दुश्मनों द्वारा फैलाया गया झूठ बताया है।
वास्तव में, दिसंबर 2025 के अंत से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अभी तक 100 से अधिक शहरों में फैल चुके हैं। तेहरान के ऐतिहासिक बाजार में व्यापारियों की हड़ताल से सरकार की स्थिति कमजोर हो रही है। इस स्थिति के बीच, भारत सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा और सतर्कता को प्राथमिकता देते हुए, सभी को आधिकारिक सूचनाओं का पालन करने और आवश्यकतानुसार भारतीय दूतावास से संपर्क करने की सलाह दे रही है।
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