Dhar Bhojshala : कोर्ट ने कहा- नमाज पर रोक नहीं, बसंत पंचमी के दिन होगी जुमे की नमाज; जानिए क्या है इतिहास

Dhar Bhojshala Case : मध्य प्रदेश में धार भोजशाला के इतिहास में बुधवार से शुरू हुई सुरक्षा व्यवस्था इस बार शुक्रवार को भी अपनी परीक्षा लेगी। जब भी बसंत पंचमी शुक्रवार को आती है, तब यहां विवाद और तनाव की स्थिति निर्मित होने की आशंका रहती है। इस बार भी दोनों समुदायों की आस्था का संगम एक ही दिन होने के कारण माहौल विशेष संवेदनशील है।

पुलिस प्रशासन ने इस बार सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। धार में पुलिस की छावनी जैसी व्यवस्था है, गलियों में खाकी वर्दी में तैनात जवानों की डेरा डाली गई है। शहर की सीमाएं सील कर दी गई हैं और आसपास की निगरानी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है। शहर की हर गली, घर की छत और मुख्य रास्तों पर निगरानी रखी जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस बार स्पष्ट कर दिया है कि दोनों ही धार्मिक आयोजन मस्जिद में नमाज और भोजशाला में मां सरस्वती की पूजा- साथ-साथ होंगे। कोर्ट ने नमाज का समय दोपहर 1 से 3 बजे का तय किया है और कहा है कि दोनों आयोजनों के लिए अलग-अलग स्थान और रास्ते बनाए जाएं।

मामले की संवेदनशीलता इस बात से समझी जा सकती है कि कोर्ट में लंबित मामलों और दोनों समुदायों की सक्रियता ने इस धार्मिक आयोजन को शक्ति प्रदर्शन का केंद्र बना दिया है। शांतिपूर्ण तरीके से पूजा और नमाज कराना सबसे बड़ी चुनौती है।

बसंत पंचमी के पहले आए शुक्रवार को, मुस्लिम समाज के लोग बड़ी संख्या में कमाल मौला मस्जिद में पहुंचे। वहीं, मंगलवार को हिन्दू समाज ने भोजशाला में अपनी ताकत दिखाई। धार में जगह-जगह भगवा यात्राएं निकाली जा रही हैं।

जब-जब शुक्रवार और बसंत पंचमी का मेल हुआ है, तब यहां तनाव और संघर्ष की स्थिति बनी है। आंसू गैस के गोले और पथराव के पुराने जख्मों के बीच, इस बार सुरक्षा चक्रव्यूह भी कड़ा कर दिया गया है। शहर की सीमाएं सील हैं, और भोजशाला व उसके आसपास निगरानी का तंत्र तगड़ा है।

प्रशासन ने शहर की शांति बनाए रखने के पूरे प्रयास किए हैं। दस हजार पुलिस जवानों की तैनाती और ड्रोन कैमरों की मदद से हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। भोजशाला को छह सेक्टरों में बांटा गया है, ताकि निगरानी आसान हो सके।

भोजशाला का इतिहास भी इस मामले को और जटिल बनाता है। यह स्थल 1010 से 1055 ईस्वी के बीच राजा भोज द्वारा बनवाया गया था, जहां देवी सरस्वती की मूर्ति स्थापित थी। 1857 में ब्रिटिश अधिकारियों ने इस मूर्ति को इंग्लैंड ले गए। वर्तमान में, यहां परंपरागत पूजा और नमाज दोनों की व्यवस्था है, जो दोनों समुदायों की धार्मिक आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करता है।

2006, 2012 और 2016 में इस दिन विवाद की स्थिति बनी थी। 2006 में तो विवाद इतना बढ़ गया कि पुलिस को आंसू गैस का प्रयोग करना पड़ा। हर बार की तरह इस बार भी प्रशासन का उद्देश्य है कि शांति और सद्भाव का माहौल बना रहे।

क्या है मुख्य चुनौती?

शांति बनाए रखना इस बार भी सबसे बड़ी चुनौती है। दोनों समुदाय अपनी-अपनी परंपराओं को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हिंदू समाज सूर्योदय से सूर्यास्त तक मां सरस्वती की पूजा कराना चाहता है, वहीं मुस्लिम समाज भी अपनी नमाज अदा करने के लिए पूरी स्वतंत्रता चाहता है।

धार भोजशाला में रहेगी सुरक्षा व्यवस्था

  • धार में बसंत पंचमी और नमाज का मेल, सुरक्षा कड़ी
  • शहर में सील और निगरानी, ड्रोन का प्रयोग
  • दोनों समुदायों की आस्था को सम्मान, प्रशासन की सतर्कता
  • इतिहास में विवाद के कड़वे अनुभव, इस बार शांति का प्रयास

धार की यह परीक्षा इस बात की है कि आस्था की दो धाराएं एक साथ कैसे मिलती हैं और कैसे शांति और सद्भाव का संदेश फैलता है।

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